झालावाड़ से ब्यूरो चीफ आसिफ शेरवानी की रिपोर्ट
किसानों के हितों की रक्षा करने और उन्हें रियायती दरों पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अनुदानित यूरिया एवं डीएपी के दुरुपयोग, कालाबाजारी, अवैध भंडारण, जमाखोरी तथा औद्योगिक इकाइयों की ओर डायवर्जन पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। कृषि आयुक्तालय ने इस संबंध में प्रदेशभर के लिए निर्देश जारी किए हैं। किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाले उर्वरकों का गैर-कृषि कार्यों में उपयोग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसी अनियमितताओं में संलिप्त व्यक्तियों के साथ ही कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
घाटोली में श्रीराम कृषि सेवा केंद्र पर कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, 597 उर्वरक बैग जब्त
घाटोली स्थित श्रीराम कृषि सेवा केंद्र पर अवैध भंडारण एवं विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर कृषि विभाग द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई। विभागीय जांच के दौरान प्रतिष्ठान पर किसानों को उर्वरक विक्रय के बिल नहीं देना, निर्धारित दर से अधिक राशि में उर्वरकों का विक्रय करना, उर्वरकों का अवैध भंडारण करना सहित विभिन्न अनियमितताएं पाई गईं। कृषि विभाग की टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए प्रतिष्ठान से कुल 595 उर्वरक बैग जब्त किए गए हैं। संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के प्रावधानों के तहत कठोरतम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़, उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण एवं निर्धारित दरों से अधिक राशि वसूलने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। किसानों से भी अपील की गई है कि उर्वरक खरीदते समय अनिवार्य रूप से पक्का बिल प्राप्त करें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना तत्काल कृषि विभाग को दें। डॉ. नरेश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि (वि.), झालावाड़ ने बताया कि जिले में खाद की कालाबाजारी पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उर्वरकों की निगरानी और सुचारू वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिलेभर में विशेष टीमों का गठन किया गया है।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि भारत सरकार की ओर से किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए यूरिया के प्रति बैग पर लगभग 2,700 रुपए और डीएपी के प्रति बैग पर लगभग 3,500 रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य किसानों की खेती की लागत कम करना, उन्हें आर्थिक राहत देना और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है। ऐसे में अनुदानित उर्वरकों का औद्योगिक अथवा अन्य गैर-कृषि कार्यों में उपयोग करना किसानों के हितों के साथ-साथ सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है।
कालाबाजारी करने वालों को तीन माह से सात वर्ष तक की सजा – कृषि आयुक्तालय ने स्पष्ट
किया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत उर्वरकों को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रखा गया है। अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत उल्लंघन के मामलों में तीन माह से सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, धारा 10 के तहत दोषी कंपनियों के साथ-साथ उनके जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, अवैध परिवहन






