Home / Breaking News / ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की माॅक संसद में महाभियोग पेश मीरा कुमार…..

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की माॅक संसद में महाभियोग पेश मीरा कुमार…..

नई दिल्ली: देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी मुद्दे पर 31 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक जन-अभियोग कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग उठाई।

यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की, जबकि खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। राहुल गांधी ने कार्यक्रम में समापन संबोधन दिया। इस आयोजन में INDIA गठबंधन के करीब 21 विपक्षी दलों के शामिल होने की बात कही गई।

फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल

विपक्ष ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया, जिससे मतदाताओं के सामने भ्रम की स्थिति पैदा हुई। विपक्ष का कहना है कि इस तरह के बदलाव से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

खड़गे ने आरोप लगाया कि संसद की अनुमति के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किया गया। उन्होंने चुनाव आयोग की जवाबदेही और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। विपक्ष का दावा है कि SIR के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की आशंका है और इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

क्या है फॉर्म-6 और क्यों हुआ विवाद?

फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। पहली बार वोटर बनने वाले नागरिक इसी फॉर्म के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करते हैं।

SIR के दौरान इसी फॉर्म के साथ अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर विवाद सामने आया। विपक्ष ने इसे फॉर्म में बदलाव बताते हुए सवाल उठाए। वहीं चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में औपचारिक संशोधन नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, अतिरिक्त घोषणा-पत्र एक अलग दस्तावेज है और इसे फॉर्म में संशोधन नहीं माना जाना चाहिए।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?

विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कई महत्वपूर्ण बातें रखीं। आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े प्रमुख आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को भी खारिज किया।

फॉर्म-6 के विवाद पर आयोग ने कहा कि निर्धारित फॉर्म में संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और आयोग ने ऐसा कोई संशोधन नहीं किया। हालांकि, आयोग ने यह स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म-6 और अतिरिक्त घोषणा-पत्र को जिस तरह प्रदर्शित किया जा रहा था, उससे उसे संशोधित फॉर्म समझे जाने की संभावना थी।

इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म-6 और अतिरिक्त घोषणा-पत्र को अलग-अलग दिखाने की व्यवस्था की बात कही।

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग क्यों?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष पहले से ही सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर अन्य चुनाव आयुक्तों ने भी आपत्तियां जताई थीं।

इन्हीं आरोपों के आधार पर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग की है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्ष की बड़ी रैली

SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की भी तैयारी की है। इस रैली के जरिए विपक्ष मतदाता सूची की प्रक्रिया, चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों को उठाने वाला है।

इस तरह SIR का मुद्दा अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी संवैधानिक जवाबदेही को लेकर भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। अब देखना होगा कि विपक्ष के इन आरोपों और मांगों पर आगे क्या राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम सामने आता है।

Tagged:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[post-views]
Share
Now