चौमहला झालावाड़ से सीताराम वर्मा की रिपोर्ट __
“संगीत कार्यशाला में विद्यार्थियों ने जाना स्वर, लय, ताल और वाद्ययंत्रों का महत्व”
गंगधार । भारतीय कला, संस्कृति एवं संगीत की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मालपुरा परिसर में शास्त्रीय संगीत कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. रेखा वर्मा उपस्थित रहीं। कार्यशाला में विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत के स्वर, लय, ताल एवं विभिन्न वाद्ययंत्रों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। कलाकारों ने गायन एवं वादन के प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों को संगीत की बारीकियों से परिचित कराया।

“कलाकारों ने संगीत और वाद्ययंत्रों की बारीकियों से कराया परिचय”
कार्यशाला में संगीत शिक्षक एवं कलाकार नागुलाल मालवीय, गायक नितिन शर्मा, तबला वादक राजेन्द्र लोहार तथा हारमोनियम वादक संजय प्रधान ने विद्यार्थियों को भारतीय संगीत की मूलभूत अवधारणाओं से परिचित कराया। कलाकारों ने प्रत्यक्ष गायन एवं वादन के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वर-साधना, लय, ताल, गायन की तकनीक तथा विभिन्न वाद्ययंत्रों की भूमिका सरल एवं रोचक तरीके से समझाई।

“संगीत से विकसित होती है एकाग्रता और रचनात्मकता : अशोक श्रीमाल”
कलाव्योम फाउंडेशन के अध्यक्ष अशोक श्रीमाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संगीत सीखने और नियमित अभ्यास करने से विद्यार्थियों में अनुशासन, एकाग्रता, संवेदनशीलता एवं रचनात्मकता का विकास होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय संगीत की परंपराओं को समझने, नियमित रूप से संगीत का अभ्यास करने तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
“कला-शिक्षा के समन्वय से नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ता कलाव्योम फाउंडेशन”
कलाव्योम फाउंडेशन कला, संस्कृति एवं पारंपरिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ने के लिए निरंतर देश भर में कार्य कर रहा है। फाउंडेशन द्वारा विद्यालयों में कार्यशालाओं, प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संगीत, लोककला, नृत्य, रंगमंच और पारंपरिक वाद्ययंत्रों से परिचित कराया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता और प्रतिभा के विकास के साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों, स्थानीय विरासत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना है।
“विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया भाग”
कार्यशाला के दौरान छात्राओं ने उत्साह और जिज्ञासा के साथ सहभागिता की। उन्होंने कलाकारों से संगीत एवं वाद्ययंत्रों से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे और प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत की स्वर एवं ताल परंपरा को समझने का प्रयास किया। कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित होने का एक सार्थक और अनुभवात्मक अवसर बनी।







