उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद अब इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। करीब 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने वाली दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को इस्तीफा देने की जानकारी साझा की। उनके इस्तीफे के बाद बीजेपी और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
मामले में बीजेपी नेता और प्रवक्ता प्रशांत उमराव ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि दिव्या मित्तल ने इस्तीफा देने से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। बीजेपी नेता ने इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक सवाल भी खड़े किए और इसे आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़ने का दावा किया।
हालांकि, राहुल गांधी से मुलाकात और इस्तीफे के बीच सीधे संबंध का दावा अभी स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुआ है। वहीं, इस्तीफे के बाद राजनीति में आने के सवाल पर दिव्या मित्तल ने फिलहाल ऐसी किसी योजना से इनकार किया है।
दिव्या मित्तल के इस्तीफे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में ईमानदार अधिकारियों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार और अधिकारियों पर दबाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ईमानदार अफसरों को स्वतंत्र रूप से काम करने का माहौल मिलना चाहिए।
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश में देवरिया, मिर्जापुर और संत कबीरनगर जैसे जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। मिर्जापुर में उनके कार्यकाल के दौरान लहुरियादह गांव में पहली बार पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने का काम भी चर्चा में रहा था।
अब सवाल यही है कि दिव्या मित्तल के इस्तीफे की असली वजह क्या है? क्या यह उनका व्यक्तिगत फैसला है या इसके पीछे प्रशासनिक और राजनीतिक परिस्थितियां भी हैं? फिलहाल बीजेपी नेता के दावे और विपक्ष के आरोपों ने इस इस्तीफे को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।
इस पूरे मामले में एक बात साफ है IAS अधिकारी का इस्तीफा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों के कामकाज के माहौल से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है। आने वाले दिनों में दिव्या मित्तल की ओर से इस्तीफे की वजह पर और स्पष्ट जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।






