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धूमधाम से निकली भोजली यात्रा, सिर पर भोजली लेकर शामिल हुईं महिलाएं

अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
धूमधाम से निकली भोजली यात्रा, सिर पर भोजली लेकर शामिल हुईं महिलाएं
तिलकेजा// छत्तीसगढ़ की समृद्ध पारंपरिक लोक संस्कृति, आपसी भाईचारे और प्रकृति प्रेम का प्रतीक माने जाने वाले भोजली पर्व के अवसर पर शनिवार को ग्राम तिलकेजा में भव्य भोजली यात्रा निकाली गई। पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक आस्था से जुड़े इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे गांव में पर्व को लेकर उत्साह और उल्लास का माहौल रहा।
भोजली यात्रा में गांव की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर भोजली लेकर शामिल हुईं। महिलाओं ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ भोजली की पूजा-अर्चना की और पारंपरिक लोकगीतों के साथ यात्रा निकाली। यात्रा के दौरान गांव की गलियों में उत्सव जैसा वातावरण देखने को मिला। महिलाओं के साथ ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भोजली पर्व की परंपरा को जीवंत बनाए रखा।
यात्रा में ग्राम पंचायत के प्रथम नागरिक सरपंच तेरस कंवर, उपसरपंच पदमा कौशिक सहित जमुना जायसवाल, पांच मनी हलवाई, राम मनोहर सोनी, नरोत्तम धीवार, किरीट राम निर्मलकर, गिरधारी लाल केवट, सीताराम केवट, उत्तम भोसले, अरविंद सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। इसके अलावा ग्राम के बैगा देवमूरत कंवर, वार्ड पंचगण, सरपंच पति तथा बड़ी संख्या में समस्त ग्रामवासी भोजली लेकर यात्रा में शामिल हुए।
भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। यह पर्व हरियाली, कृषि और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं भोजली की स्थापना कर उसकी विधिवत पूजा करती हैं और पर्व के समापन अवसर पर भोजली को सिर पर रखकर सामूहिक रूप से यात्रा निकालती हैं। इस दौरान पारंपरिक गीतों के माध्यम से सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और गांव में खुशहाली की कामना की जाती है।
ग्राम तिलकेजा में आयोजित भोजली यात्रा ने ग्रामीणों की एकजुटता और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति उनके लगाव को प्रदर्शित किया। महिलाओं और ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी से आयोजन की भव्यता और बढ़ गई। यात्रा के दौरान लोगों ने एक-दूसरे को भोजली पर्व की शुभकामनाएं दीं और आपसी प्रेम, सद्भाव एवं भाईचारे का संदेश दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति और रीति-रिवाजों को जीवित रखना सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे सामूहिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भोजली यात्रा के सफल आयोजन से ग्राम तिलकेजा में उत्सव का माहौल बना रहा और लोगों ने पूरे उत्साह के साथ पर्व मनाया।

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