बरेली। इज्जतनगर थाना पुलिस पर एक व्यक्ति ने अपने बेटे और परिवार के एक अन्य सदस्य को कथित रूप से अवैध हिरासत में रखने, मारपीट करने और ₹10 हजार की मांग करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली को शिकायती पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम अकदुल्लापुर माफी, थाना इज्जतनगर निवासी राजकुमार पुत्र टीका राम ने एसएसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 28 जुलाई 2026 को परिवार के बीच हुई कहासुनी के बाद उनके पुत्रों के खिलाफ उनके छोटे भाई के पुत्र की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक मुकदमे की विवेचना के दौरान कुछ धाराओं में बदलाव भी किया गया। इसी मुकदमे को लेकर बाद में पुलिस की कार्रवाई शुरू हुई।
रात करीब एक बजे घर पहुंची पुलिस
राजकुमार का आरोप है कि 18 अगस्त की रात करीब एक बजे दरोगा आफताब खान अन्य पुलिसकर्मियों के साथ उनके घर पहुंचे। शिकायत के मुताबिक पुलिस उनके पुत्र संजय को अपने साथ ले गई। आरोप है कि संजय को सीधे थाने ले जाने के बजाय कथित तौर पर दरोगा आफताब खान के आवास पर ले जाया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वहां उनके बेटे से ₹10 हजार की मांग की गई। जब संजय ने रुपये देने में असमर्थता जताई तो उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। राजकुमार ने इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। हालांकि शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की अभी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पिता को भी उठाकर ले जाने का आरोप
राजकुमार का कहना है कि इसके बाद पुलिस ने उनके घर पर दोबारा दबिश दी और उन्हें भी अपने साथ ले गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ भी कथित रूप से मारपीट की गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस मुकदमे को लेकर पुलिस कार्रवाई कर रही थी, उसमें उनकी गिरफ्तारी का कोई स्पष्ट आधार नहीं था, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया।
राजकुमार ने आरोप लगाया कि FIR में उनका नाम नहीं होने के बावजूद पुलिस उन्हें भी घर से उठाकर ले गई। उन्होंने इस कार्रवाई की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए एसएसपी से यह जांच कराने की मांग की है कि उन्हें किन परिस्थितियों में हिरासत में लिया गया और पुलिस रिकॉर्ड में इस संबंध में क्या उल्लेख किया गया।
परिजनों को जानकारी न देने का भी आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब परिवार के सदस्यों ने पुलिस से राजकुमार और संजय की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी मांगी तो कथित तौर पर संबंधित दरोगा ने गिरफ्तारी से इनकार किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे परिजन परेशान रहे और उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी कि दोनों को कहां और किस आधार पर रखा गया है।
राजकुमार के मुताबिक उन्हें 19 अगस्त की दोपहर करीब 12 बजे छोड़ दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें 18 अगस्त की रात घर से ले जाया गया था और अगले दिन दोपहर में छोड़ा गया। इस अवधि को लेकर भी उन्होंने एसएसपी से पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
एसएसपी से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
राजकुमार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अवैध हिरासत, मारपीट अथवा रुपये मांगने के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए सभी आरोप फिलहाल आरोप मात्र हैं और उनकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष और जांच के तथ्य सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है।






