Home / News / दुष्कर्म के गंभीर आरोप पर पुलिस की चुप्पी, कई दिनों से थाने में पड़ा रहा आवेदन; कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल….

दुष्कर्म के गंभीर आरोप पर पुलिस की चुप्पी, कई दिनों से थाने में पड़ा रहा आवेदन; कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल….

समस्तीपुर/विभूतिपुर। विभूतिपुर थाना क्षेत्र की 23 वर्षीय युवती से कथित दुष्कर्म और उसके चार माह की गर्भवती होने के आरोप ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता की मां द्वारा थाना में आवेदन दिए कई दिन बीत जाने के बावजूद मामले में प्राथमिकी और पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

आवेदन में योग प्रशिक्षक , उसकी पत्नी सहित अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़िता की मां का आरोप है कि योग प्रशिक्षण के दौरान आरोपी का युवती के संपर्क में आना-जाना हुआ और बाद में अलग-अलग स्थानों पर युवती के साथ जबरदस्ती की गई। आवेदन में पटना के एक होटल में भी घटना होने का आरोप लगाया गया है।

मामले को और गंभीर बनाता है युवती के गर्भवती होने का दावा। आवेदन के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को कराए गए अल्ट्रासाउंड में करीब चार माह की गर्भावस्था की जानकारी सामने आई। इसके बाद परिवार द्वारा न्याय की गुहार लगाने के बावजूद पुलिस कार्रवाई में कथित देरी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

थाने में आवेदन, फिर भी कार्रवाई कहां?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पीड़िता की मां ने गंभीर आपराधिक आरोपों को लेकर थाना में आवेदन दिया है, तो पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की? क्या आवेदन की जांच शुरू हुई? क्या पीड़िता का बयान दर्ज किया गया? क्या मेडिकल जांच कराई गई? क्या आरोपितों से पूछताछ हुई? क्या घटनास्थल और बताए गए होटल से संबंधित तथ्यों की जांच की गई? और यदि प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है तो इसका कारण क्या है?

गंभीर आरोपों वाले मामले में पुलिस की भूमिका केवल आवेदन लेने तक सीमित नहीं रह सकती। आरोप सही हैं या गलत, यह जांच और साक्ष्यों से तय होगा, लेकिन निष्पक्ष जांच शुरू करना पुलिस की जिम्मेदारी है।

सोशल मीडिया पर चर्चा, पुलिस की चुप्पी पर सवाल

मामला अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है। लोग अपने-अपने स्तर से पोस्ट और प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब मामला सार्वजनिक चर्चा में है, तब पुलिस की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है?

पीड़िता को न्याय दिलाने के साथ-साथ आरोपित पक्ष के अधिकारों की रक्षा के लिए भी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। पुलिस को किसी भी पक्ष के दबाव से मुक्त होकर साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

थाना अध्यक्ष की भूमिका पर भी उठे सवाल

मामले में थाना स्तर पर आवेदन मिलने के बाद अब तक की कार्रवाई को सार्वजनिक नहीं किए जाने से विभूतिपुर थाना अध्यक्ष की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि गंभीर आरोप वाले आवेदन पर जानबूझकर कार्रवाई में लापरवाही या अनावश्यक देरी की गई, तो संबंधित पुलिस पदाधिकारी की जवाबदेही तय होना जरूरी है।

ऐसे मामले में सवाल केवल एक प्राथमिकी का नहीं, बल्कि पुलिस की संवेदनशीलता, जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन का है।

अब निगाहें पुलिस के वरीय अधिकारियों पर हैं। क्या वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ थाना स्तर पर आवेदन लंबित रहने की भी जांच कराएंगे? यदि किसी पुलिस पदाधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो क्या उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई होगी? यही सवाल फिलहाल पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

पुलिस का पक्ष : खबर लिखे जाने तक मामले में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। पुलिस का पक्ष प्राप्त होते ही उसे प्राथमिकता के साथ अगली रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। फिलहाल लगाए गए आरोप पीड़िता की मां द्वारा दिए गए आवेदन पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

नोट:पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।

लोकेशन – समस्तीपुर
रिपोर्ट – नवनीत कुमार झा

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