ढेलवाडीह। पर्यावरण संरक्षण और हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शासकीय प्राथमिक शाला ढेलवाडीह में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों, अभिभावकों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे और उनकी सुरक्षा व देखभाल का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण से हुई, जिसमें बच्चों ने पूरे उत्साह और लगन के साथ भाग लिया। विद्यालय परिसर में लगाए गए पौधों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराया गया। इस अवसर पर शिक्षकों ने बच्चों को पेड़ों के महत्व, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों तथा हर व्यक्ति द्वारा अधिक से अधिक पौधे लगाने की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्रधान पाठक पुनी राम सुरेन ने कहा कि वृक्ष केवल हमें शुद्ध वायु ही नहीं देते, बल्कि जल संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल पौधे लगाकर ही न रुकें, बल्कि उनकी नियमित सिंचाई और देखभाल भी करें, ताकि वे बड़े होकर छायादार वृक्ष बन सकें।
कार्यक्रम में उपस्थित सरपंच श्रीमती मीना बाई कंवर ने बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत विद्यालय और घर से ही होती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण मिल सकेगा।
सहायक शिक्षक राजू प्रसाद कश्यप सहित अन्य शिक्षकों ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई और कहा कि पेड़-पौधे पृथ्वी की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण से ही स्वस्थ जीवन और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान गजानंद सिंह कंवर, शिवम कुमार चौहान, मोहन यादव, प्रेम कला यादव, चांदनी बाई चौहान, श्याम कुमारी चौहान सहित विद्यालय परिवार, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया।
विद्यालय परिवार ने अंत में संदेश दिया कि “एक पेड़, अनेक जीवन” की भावना को अपनाकर प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। बच्चों ने अपने उत्साह और सहभागिता से यह साबित किया कि प्रकृति के प्रति जागरूकता बचपन से ही विकसित की जाए तो समाज में हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण का सपना साकार किया जा सकता है।
अशोक कुमार श्रीवास की खास रिपोर्ट तुमान से









