चित्रकूट – जनपद चित्रकूट के समाजसेवी व पत्रकार संजय मिश्रा द्वारा बताया गया कि यूजीसी कानून पारित होने पर छात्र-छात्राओं की शिक्षा पर कई अहम प्रभाव और कुछ संभावित प्रभाव पड़ सकते है।पारित होने वाला कानून छात्र छात्राओं के हितार्थ नहीं है। युवाओं की शिक्षा को दृष्टिगत रखते हुए सरकार को इस नए कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लेना चाहिए। श्री मिश्रा द्वारा यूजीसी कानून के संदर्भ में विस्तृत जानकारी निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया।
- शिक्षा का व्यावसायीकरण: यूजीसी की अनुदान-आधारित व्यवस्था को समाप्त कर एक ऐसे नियामक निकाय की स्थापना की जा रही है, जिसके पास दंडात्मक शक्तियाँ तो होंगी, लेकिन अनुदान देने का कोई प्रावधान नहीं है। इससे शिक्षा का व्यवसायीकरण बढ़ सकता है।
- फीस वृद्धि: विश्वविद्यालयों को फीस बढ़ाने, स्वयं-वित्तपोषित पाठ्यक्रम शुरू करने और प्रमुखों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों को लागू करने की अनुमति मिल सकती है।
- शैक्षणिक स्वतंत्रता पर खतरा: यूजीसी कानून विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को खतरे में डाल सकता है।
- असमानता: यूजीसी कानून समानता के खिलाफ है और यह छात्रों के हितों की हत्या जैसा है।
- जातिगत भेदभाव: कुछ संगठनों का आरोप है कि यूजीसी कानून जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देता है।
- शिक्षा की गुणवत्ता: यूजीसी कानून शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रभाव डाल सकता है, खासकर अगर विश्वविद्यालयों को अनुदान नहीं मिलता है। यह कानून छात्र-छात्राओं के लिए चिंताजनक है,






