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चुनाव आते ही ED एक्टिव? तमिलनाडु से बंगाल तक एक ही ट्रेंड?

देश में चुनावी सरगर्मी के बीच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कार्रवाइयों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलग–अलग राज्यों में जैसे ही चुनाव नज़दीक आते हैं, वैसे ही विपक्षी नेताओं और उनके करीबियों पर ED की सक्रियता तेज़ हो जाती है। इसी ट्रेंड को लेकर दैनिक भास्कर ने एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के ज़रिए सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के उदाहरण दिए गए हैं, जहां चुनाव से ठीक पहले या चुनावी माहौल के दौरान ED ने बड़े पैमाने पर छापेमारी और पूछताछ की। भास्कर के मुताबिक, कई मामलों में जांच सालों से लंबित थी, लेकिन कार्रवाई अचानक चुनावी मौसम में तेज़ हो गई।
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े मंत्रियों और उनके रिश्तेदारों पर रेड, बंगाल में विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और झारखंड में चुनावी ऐलान के साथ बढ़ी ED की गतिविधियां — इन सबको जोड़कर भास्कर ने एक पैटर्न की ओर इशारा किया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ED जैसी केंद्रीय एजेंसियां भले ही भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग पर कार्रवाई के लिए बनी हों, लेकिन उनके कदमों का टाइमिंग राजनीतिक बहस को जन्म दे रहा है। विपक्षी दल लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्र सरकार इन एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए करती है।
वहीं सरकार का पक्ष रहा है कि ED पूरी तरह कानून के तहत और सबूतों के आधार पर काम करती है, और उसका चुनाव से कोई लेना–देना नहीं होता। सरकार यह भी कहती रही है कि जिन नेताओं पर कार्रवाई हो रही है, उनके खिलाफ पहले से जांच चल रही थी।

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