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प्रस्तावित बाबरी मस्जिद मामले में हाईकोर्ट से हुमायूं कबीर को मिला सहारा कोर्ट ने….

पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर छिड़ी सियासी बहस के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तृणमूल से बागी हो चुके नेता हुमायूं कबीर के खिलाफ दायर उस याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें मुर्शिदाबाद में “बाबरी मस्जिद” नाम से धार्मिक ढांचा खड़ा करने की कोशिश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

कोर्ट का साफ कहना हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता न तो जमीन का मालिक है और न ही उसके पास इस मामले में हस्तक्षेप का कोई कानूनी आधार है। ऐसे में कोर्ट किसी व्यक्ति के “घोषणात्मक बयानों” के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी कहा कि अगर किसी तरह का निर्माण होता है और वह स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करता है, तो कार्रवाई करने का अधिकार प्रशासनिक संस्थाओं के पास है, अदालत के पास नहीं।

राजनीतिक हलचल तेज हुमायूं कबीर ने हाल ही में 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में “बाबरी मस्जिद” की नींव रखने की घोषणा कर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया था। तृणमूल कांग्रेस ने उनके बयान को उकसाने वाला बताया, जबकि विपक्ष ने इसे वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखा।

अब अदालत की टिप्पणी के बाद सियासी बयानबाज़ी और तेज होने के आसार हैं।क्या कहा हुमायूं कबीर ने?फैसले के बाद कबीर ने दावा किया कि वे कानून के दायरे में रहते हुए काम करेंगे और धार्मिक सौहार्द को आहत किए बिना अपनी “प्रतिबद्धता” निभाएंगे। हालांकि, जिला प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी नए निर्माण के लिए वैध अनुमति अनिवार्य होगी।

कोर्ट का यह कदम मामले को पूरी तरह राजनीतिक दायरे में धकेलता दिख रहा है। यदि कबीर सच में किसी तरह का निर्माण शुरू करते हैं, तो प्रशासन की भूमिका और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह इस विवाद में मध्यस्थ नहीं बनेगा।

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