उत्तर प्रदेश के झांसी में इंसानियत को गिरवी रख दिया गया।
एक प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस बैंक ने लोन की किश्त न चुकाने पर एक महिला को 5 घंटे तक बंधक बनाकर रखा। पति से कहा कि किश्त दो, तभी पत्नी को ले जाओ
ये कौन सा कानून है? क्या लोन वसूली के नाम पर अब महिलाओं की गरिमा बंधक बनायी जाएगी? ये गुंडई है, अराजकता है और किसी ग़रीब के स्वाभिमान पर हमला है।
ये मामला सिर्फ एक महिला का नहीं है, ये हमला हर आम परिवार की इज्जत और आज़ादी पर है।
अगर कर्ज़ ना चुका पाने पर बंधक बनना पड़े, तो ये देश कानून से चलता है या फिर लोन माफ़िया से?
ऐसे बैंक कर्मियों पर कार्यवाही हो






