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26 महीने बाद रामबेटी हत्याकांड में बड़ा मोड़: SSP अनुराग आर्य की मॉनिटरिंग में खुलती गईं केस की परतें, बेटा महेंद्र गिरफ्तार

पांच लोगों पर हत्या के आरोप से शुरू हुई थी जांच; कई विवेचक बदलने के बाद वैज्ञानिक पड़ताल तक पहुंचा मामला, पॉलीग्राफ से लेकर मेडिकल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने बदली विवेचना की दिशा

बरेली। भमोरा थाना क्षेत्र के गांव कुड्ढा के चर्चित रामबेटी हत्याकांड में करीब 26 महीने बाद पुलिस जांच ने बड़ा मोड़ लिया है। जिस हत्या में शुरुआत में परिवार के पांच लोगों को नामजद किया गया था, लंबी विवेचना के बाद पुलिस ने मृतका के बेटे महेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि मेडिकल, मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ने के दौरान महेंद्र की भूमिका प्रथमदृष्टया सामने आई। हालांकि पुलिस की विवेचना में आरोपी बनाया जाना दोषसिद्धि नहीं है और मामले का अंतिम फैसला न्यायालय करेगा।

इस हत्याकांड की जांच में अहम पड़ाव तब आया जब कई विवेचकों के बावजूद गुत्थी नहीं सुलझ सकी। दिसंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद एसएसपी अनुराग आर्य की मॉनिटरिंग में मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर को सौंपी गई। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और मामला वैज्ञानिक परीक्षण तक पहुंचा।

🔴 पांच लोगों पर आरोप से शुरू हुई थी कहानी

पुरानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 6 अगस्त 2024 की रात कुड्ढा गांव निवासी 55 वर्षीय रामबेटी की हत्या हुई थी। मृतका के बेटे विजेंद्र ने परिवार के पांच लोगों पर कोटे की रंजिश के चलते हत्या करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की और नामजद लोगों के अलावा अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की।

समय बीतने के बावजूद हत्याकांड की गुत्थी नहीं सुलझी। विवेचक बदले, बयान दर्ज हुए और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश होती रही, लेकिन जांच निर्णायक मुकाम तक नहीं पहुंच सकी।

🔴 SSP अनुराग आर्य की मॉनिटरिंग में बदली जांच की रणनीति

लंबे समय से अनसुलझे मामले में एसएसपी अनुराग आर्य की मॉनिटरिंग में जांच को नए सिरे से आगे बढ़ाया गया। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर को दी गई। संजय धीर ने केस से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और बयानों की पड़ताल के साथ जांच का दायरा नामजद आरोपियों से आगे बढ़ाया।

महत्वपूर्ण बात यह रही कि पुलिस ने शुरुआती आरोपों को ही अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय वैज्ञानिक साक्ष्यों की मदद लेने का रास्ता अपनाया। आरोपी पक्ष के साथ वादी पक्ष से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।

🔴 छह संदिग्धों को दिल्ली ले जाकर पॉलीग्राफ टेस्ट

दिसंबर 2025 की प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पांच नामजद लोगों और एक अन्य संदिग्ध समेत छह व्यक्तियों का नई दिल्ली स्थित केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला में पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। परीक्षण की प्रक्रिया 8 से 11 दिसंबर के बीच चली थी।

इस चरण से साफ हुआ कि पुलिस इस हत्याकांड को केवल पुराने बयानों के आधार पर नहीं देख रही थी। वैज्ञानिक परीक्षणों से भी घटना की वास्तविक परिस्थितियों तक पहुंचने की कोशिश की गई।

🔴 जांच की आंच वादी पक्ष तक पहुंची, महेंद्र भी दायरे में

पुलिस विवेचना में बड़ा मोड़ तब आया जब वादी पक्ष के लोगों को भी वैज्ञानिक परीक्षण के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक मुकदमे के वादी विजेंद्र, उसके भाई महेंद्र, परिवार के अन्य सदस्यों और एक अन्य व्यक्ति का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की तैयारी की गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया कि शुरुआत में परीक्षण के लिए सहमति दी गई और पुलिस ने न्यायालय से अनुमति भी प्राप्त की, लेकिन बाद में टेस्ट नहीं हो सका। इसके बाद महेंद्र का फोरेंसिक साइकोलॉजी असेसमेंट (FPA) कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई थी।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पॉलीग्राफ या किसी अन्य परीक्षण से इनकार करना अथवा परीक्षण का नहीं हो पाना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। लेकिन इससे यह जरूर सामने आता है कि उस समय तक विवेचना में महेंद्र की भूमिका भी जांच के दायरे में आ चुकी थी।

🔴 SSP स्तर से होती रही केस की मॉनिटरिंग

रामबेटी हत्याकांड की जांच की गंभीरता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि एसएसपी अनुराग आर्य ने उस समय जांच की प्रगति को लेकर मीडिया को जानकारी दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया था कि मामले की विवेचना संजय धीर को दी गई है और नामजद समेत छह संदिग्धों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया है। वादी पक्ष के परीक्षण की कोशिश की जानकारी भी सामने आई थी।

इस तरह एसएसपी अनुराग आर्य की मॉनिटरिंग में जांच का दायरा बढ़ा और वैज्ञानिक पहलुओं को विवेचना से जोड़ा गया।

🔴 संजय धीर की विवेचना में जोड़ी गईं पुरानी कड़ियां

वर्तमान में कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर इस मुकदमे के विवेचक रहे। पुलिस की ताजा जानकारी के अनुसार जांच में मेडिकल साक्ष्यों, गवाहों के कथनों, मृतका की घटना वाली रात मौजूदगी तथा घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों का परीक्षण किया गया।

पुलिस का दावा है कि इन्हीं मेडिकल, मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ने पर महेंद्र सिंह की भूमिका प्रथमदृष्टया सामने आई। इसके बाद उसके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

🔴 26 महीने बाद महेंद्र गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक 30 सितंबर 2026 को महेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। कार्रवाई करने वाली टीम में विवेचक संजय कुमार धीर, उपनिरीक्षक अनीज कुमार और हेड कांस्टेबल सुंदरपाल सिंह शामिल बताए गए हैं।

करीब 26 महीने तक अलग-अलग पड़ावों से गुजरे रामबेटी हत्याकांड में एसएसपी अनुराग आर्य की मॉनिटरिंग में जांच को वैज्ञानिक दिशा देना और विवेचक संजय धीर द्वारा पुराने तथ्यों व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ना महत्वपूर्ण पड़ाव रहे। अब पुलिस की विवेचना में सामने आए दावों और जुटाए गए साक्ष्यों की अंतिम परीक्षा अदालत में होगी।

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