Home / International / इसराइल के कहने पर ईरान के साथ युद्ध में फंसे ट्रंप पर दोहरी मार अब लौटाना पड़ेगा वसूला टैरिफ…

इसराइल के कहने पर ईरान के साथ युद्ध में फंसे ट्रंप पर दोहरी मार अब लौटाना पड़ेगा वसूला टैरिफ…

अमेरिकी व्यापार नीति से जुड़ी एक बड़ी कानूनी उलटफेर में, Donald Trump के टैरिफ फैसले को झटका लगा है। अब उनकी सरकार को उन अरबों डॉलर की वसूली वापस करनी पड़ रही है, जो हाल के वर्षों में आयात शुल्क के रूप में ली गई थी। यह घटनाक्रम न सिर्फ अमेरिका की नीति पर सवाल उठाता है, बल्कि वैश्विक व्यापार पर भी असर डाल सकता है—हालांकि भारत पर इसका सीधा प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।

ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद “अमेरिका फर्स्ट” रणनीति के तहत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए थे। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना था, लेकिन इसके चलते अमेरिकी बाजार में आयातित सामान महंगा हो गया और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। भारत भी उन देशों में शामिल रहा, जिस पर ऊंचे शुल्क लगाए गए थे।

मामला तब पलट गया जब Supreme Court of the United States ने 20 फरवरी 2026 को अपने फैसले में इन टैरिफ को अवैध करार दे दिया। अदालत ने 6-3 के बहुमत से स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को इस तरह के शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। संविधान के अनुसार, यह शक्ति केवल कांग्रेस के पास है। ट्रंप प्रशासन ने जिन टैरिफ को लागू करने के लिए International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का सहारा लिया था, अदालत ने उसे इस उद्देश्य के लिए अनुपयुक्त माना।

इस फैसले के बाद अब अमेरिकी प्रशासन ने टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन आयातकों ने ये शुल्क चुकाए थे, उन्हें ऑनलाइन आवेदन के जरिए अपना दावा दर्ज करना होगा। स्वीकृत दावों का भुगतान आमतौर पर 60 से 90 दिनों के भीतर किया जा सकता है, हालांकि तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इसमें देरी भी संभव है। सरकार चरणबद्ध तरीके से रिफंड जारी करेगी, जिसमें हाल के भुगतानों को प्राथमिकता दी जाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 3.3 लाख आयातकों ने 5.3 करोड़ से अधिक शिपमेंट्स पर लगभग 166 अरब डॉलर का टैरिफ चुकाया था। इसे अब तक के सबसे बड़े टैरिफ रिफंड अभियानों में से एक माना जा रहा है।

जहां तक भारत का सवाल है, भारतीय निर्यातकों को इस रिफंड का सीधा लाभ नहीं मिलेगा। इसका कारण यह है कि ज्यादातर मामलों में अमेरिकी खरीदार ही “Importer of Record” होता है, जो अमेरिकी कस्टम्स को शुल्क अदा करता है। इसलिए रिफंड भी उसी को मिलेगा। भारतीय व्यापारियों पर इसका असर अप्रत्यक्ष रूप से ही देखा जा सकता है, जैसे भविष्य में व्यापारिक शर्तों या कीमतों में बदलाव के रूप में।

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