नंदानगर का बैंड बाजार इन दिनों खौफ और बेचैनी के साए में है। ऊपर पहाड़ी इलाके पलपाणी तोक में ज़मीन धंसती जा रही है, और उसका असर नीचे पूरे बाजार पर दिखने लगा है। शनिवार की सुबह लोगों के लिए डरावना सपना बनकर आई — चार कमरों का एक घर मिट्टी में समा गया, चार गोशालाएं भी जमींदोज़ हो गईं। खेतों में एक-एक फीट की दरारें दिखने लगीं, पेड़ तक उखड़ गए। लोग अपनी आंखों के सामने अपने घर टूटते देख रहे हैं। बाजार की 25 दुकानें खतरे के मुहाने पर हैं — रोज़ी-रोटी के इन ठिकानों के शटर अब डर से बंद पड़े हैं। व्यापारी खुलकर कह रहे हैं: “अब दुकान खोलने की भी हिम्मत नहीं बची।”
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इस तबाही के बीच, इंसानी ज़िंदगियाँ सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं। 34 परिवारों को रातोंरात अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में जाना पड़ा — कोई रिश्तेदारों के पास गया, कोई किराए के नए मकानों में शिफ्ट हुआ। कुछ तो बारात घर के एक कोने में अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ ठहर गए हैं, क्योंकि और कोई रास्ता नहीं बचा। जिन घरों में कभी चूल्हा जलता था, वहां अब मलबा और सन्नाटा पसरा है। प्रशासन अलर्ट पर है, लेकिन लोग अब भी डरे हुए हैं — हर दरार के साथ डर और गहराता जा रहा है।






