बरेली। स्मार्ट सिटी के नाम पर सोशल मीडिया और प्रचार माध्यमों में दिखाई जाने वाली चमकदार तस्वीरों के बीच रविवार को हुई चंद घंटों की बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की असल तस्वीर सामने ला दी। शहर के प्रमुख और पॉश व्यावसायिक इलाकों में शामिल डीडीपुरम की कई सड़कें पानी में डूब गईं। मुख्य मार्गों पर भारी जलभराव के कारण राहगीरों, वाहन चालकों और व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
बारिश के बाद डीडीपुरम की सड़कों पर जगह-जगह इतना पानी जमा हो गया कि सामान्य यातायात प्रभावित हो गया। दोपहिया वाहन चालकों को पानी के बीच से निकलने में दिक्कत हुई, जबकि कई जगह दुकानों और प्रतिष्ठानों के बाहर तक पानी पहुंच गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक नालियों और नालों से पानी की निकासी अपेक्षित गति से नहीं हो सकी, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों पर जमा होता चला गया।
नाले उफनाए, दुकानों और बेसमेंट तक पहुंचा पानी
डीडीपुरम के मुख्य बाजार और आसपास के आवासीय हिस्सों में जलभराव ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि कई स्थानों पर नाले ओवरफ्लो होने के बाद गंदा पानी सड़कों पर आ गया। कुछ प्रतिष्ठानों और बेसमेंट के आसपास भी पानी भरने की स्थिति बनी।
व्यापारियों का कहना है कि मानसून से पहले नगर निगम की ओर से नाला सफाई का दावा किया गया था, लेकिन बारिश के दौरान बने हालात ने सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि यदि नालों से सिल्ट समय रहते पूरी तरह निकाल दी जाती और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त होती तो इतनी गंभीर स्थिति नहीं बनती।
डीडीपुरम ही नहीं, कई इलाकों में जलभराव
बारिश का असर केवल डीडीपुरम तक सीमित नहीं रहा। शहर के सिविल लाइंस, सुभाषनगर पुलिया, पुराना शहर, राजेंद्रनगर और कुदेशिया फाटक समेत कई क्षेत्रों में जलभराव से लोगों को परेशानी हुई। कई स्थानों पर पानी जमा होने और वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ने से जाम जैसी स्थिति भी बनी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में यही समस्या सामने आती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता। कुछ क्षेत्रों में नालों से निकली सिल्ट और कचरा समय पर न हटाए जाने को भी समस्या की एक वजह बताया जा रहा है।
नगर निगम और मेयर की कार्यशैली पर सवाल
जलभराव के बाद सोशल मीडिया पर भी नगर निगम प्रशासन और मेयर डॉ. उमेश गौतम की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का आरोप है कि शहर की बुनियादी समस्याओं के समाधान की तुलना में प्रचार और सोशल मीडिया पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी की असली पहचान केवल सौंदर्यीकरण, आकर्षक लाइटिंग और सोशल मीडिया रील्स से नहीं, बल्कि मजबूत सड़क, बेहतर सीवर और प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था से होनी चाहिए। यदि शहर के पॉश इलाके में कुछ घंटों की बारिश के बाद ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं तो अन्य निचले इलाकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थायी समाधान की मांग
व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने नगर निगम से प्रभावित इलाकों में तत्काल जल निकासी कराने, नालों की दोबारा सफाई कराने और ड्रेनेज सिस्टम की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हर बारिश के बाद अस्थायी रूप से पंप लगाकर पानी निकालना समाधान नहीं है।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो व्यापारी और नागरिक आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। अब सवाल यह है कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बरेली की सड़कों को बारिश के दौरान जलभराव से कब तक जूझना पड़ेगा?






