मुख्य बिंदु
- हिमांशु पटेल, निर्दोष राठौर और देवेंद्र पटेल समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज।
- परिजनों का आरोप- वीडियो वायरल होने के बाद छात्रा मानसिक तनाव में आई और उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
- कैफे संचालक ने भी नामजद आरोपियों पर रंगदारी और धमकी के आरोप लगाए।
- निर्दोष राठौर ने वीडियो जारी कर कहा- “वीडियो वायरल करना गुनाह नहीं है।”
- पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल डेटा, सीसीटीवी और सोशल मीडिया रिकॉर्ड की जांच में जुटी है।
बरेली।
बिथरी चैनपुर क्षेत्र की नाबालिग छात्रा की कथित आत्महत्या का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस मामले में अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होटल से जुड़े घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने वालों की भूमिका बन गया है। छात्रा के परिजनों का आरोप है कि वीडियो वायरल होने के बाद वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई थी और इसी कारण उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। पुलिस ने इस मामले में हिमांशु पटेल, निर्दोष राठौर, देवेंद्र पटेल समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एफआईआर के अनुसार, छात्रा के भाई ने आरोप लगाया है कि बहन का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, जिससे उसकी पहचान सार्वजनिक हो गई। शिकायत में कहा गया है कि वीडियो के प्रसार के बाद छात्रा सामाजिक बदनामी और मानसिक दबाव का सामना कर रही थी। परिजनों का आरोप है कि इसी मानसिक प्रताड़ना के कारण उसने अपनी जान दे दी। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है।
मामले में कैफे संचालक ने भी पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया है कि होटल में पहुंचे कुछ लोगों ने हंगामा किया, रंगदारी मांगी और बाद में पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। पुलिस इस शिकायत की भी जांच कर रही है और दोनों मामलों के तथ्यों को जोड़कर साक्ष्य जुटा रही है।
इसी बीच नामजद आरोपी निर्दोष राठौर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताया। उसने दावा किया कि उन्होंने केवल पुलिस कार्रवाई का वीडियो साझा किया था और किसी युवती की पहचान सार्वजनिक नहीं की। उसने यह भी कहा कि “वीडियो वायरल करना गुनाह नहीं है।” आरोपी ने पुलिस पर रंजिशन झूठा मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसे और उसके साथियों को बिना पर्याप्त साक्ष्यों के फंसाया गया है।
दूसरी ओर हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार फौजी के नेतृत्व में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एसएसपी कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की। संगठन का दावा है कि हिमांशु पटेल, निर्दोष राठौर और देवेंद्र पटेल को बिना ठोस साक्ष्यों के नामजद किया गया है। उन्होंने वीडियो बनाने और वायरल करने के आरोपों से भी इनकार किया है।
फिलहाल पुलिस मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो रिकॉर्ड करने, प्रसारित करने और वायरल करने में किसकी क्या भूमिका थी। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई केवल जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। वहीं, छात्रा के परिजन वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि नामजद आरोपी सभी आरोपों को निराधार बता रहे हैं।






