यशपाल जाट एक्सप्रेस न्यूज भारत
एसईसीएल चिरमिरी आर-6 खदान में मजदूर की दर्दनाक मौत –. गुलाब कमरों ने एसईसीएल प्रबंधन की लापरवाही, अमानवीयता और चुप्पी पर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ एसईसीएल चिरमिरी आर-6 खदान में मजदूर की दर्दनाक मौत –. गुलाब कमरों ने एसईसीएल प्रबंधन की लापरवाही, अमानवीयता और चुप्पी पर उठाए सवाल एसईसीएल चिरमिरी आर-6 खदान में मजदूर की दर्दनाक मौत –. गुलाब कमरों ने एसईसीएल प्रबंधन की लापरवाही, अमानवीयता और चुप्पी पर उठाए सवाल एसईसीएल चिरमिरी आर-6 खदान मे मजदूर की दर्दनाक मौत गुलाब कमरों ने एसईसीएल प्रबंधन की लापरवाही, अमानवीयता और चुप्पी पर उठाए सवाल एसईसीएल चिरमिरी क्षेत्र की आर-6 खदान में शनिवार को हुआ भयावह हादसा ना सिर्फ एक मजदूर की जिंदगी लील गया, बल्कि कंपनी की लचर सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनहीन प्रबंधन की पोल भी खोल गया। कोरिया कॉलरी निवासी मजदूर लल्लू प्रसाद की कन्वेयर बेल्ट की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की वीभत्सता इतनी भयावह थी कि मजदूर का शव दो हिस्सों में कट गया मौत या हत्या? मशीन चालू होने से हुआ हादसा प्राप्त जानकारी के अनुसार, लल्लू प्रसाद कन्वेयर बेल्ट बदलने का कार्य कर रहा था, तभी अचानक मशीन चालू हो गई और वह बेल्ट में बुरी तरह फंस गया। बेल्ट ने उसे इस कदर चपेट में लिया कि उसका शरीर दो टुकड़ों में विभाजित हो गया। हादसे के बाद शव को प्लास्टिक में लपेटकर अस्पताल लाना, एसईसीएल की अमानवीय कार्यशैली और मजदूरों के प्रति उपेक्षा को स्पष्ट करता है
सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ दिखावा – ज़मीनी हकीकत भयावह यह कोई पहली घटना नहीं है। हर साल सेफ्टी वीक, लाखों की ट्रेनिंग, सेमिनार और पोस्टर सिर्फ दिखावे की खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। खदान में कार्यरत मजदूरों को कोई पुख्ता सुरक्षा नहीं मिलती। हर दिन वे जान हथेली पर रखकर खदान में उतरते हैं। क्या यही है सुरक्षा प्रबंधन? प्रबंधन मौन, अधिकारी लापता – कौन है जिम्मेदार घटना के बाद न तो एसईसीएल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया, न ही कोई अधिकारी मीडिया के सामने आया, यह चुप्पी दर्शाती है कि जवाबदेही से बचने की कोशिश, सच्चाई से मुंह फेरना और मजदूर की मौत को “नियमित दुर्घटना” मानकर पल्ला झाड़ लेना कंपनी की प्रवृत्ति बन गई है ट्रेड यूनियन का आक्रोश ट्रेड यूनियन काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही से हुई एक हत्या है। बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स में सुरक्षा का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं बची है। क्या सुरक्षा सिर्फ अधिकारियों तक सीमित रह गई है?मशीनें इंसानों से ज्यादा कीमती कब से हो गईं? क्या एक मजदूर की मौत सिर्फ फाइलों में सिमट जाएगी, या इस बार कोई असली कार्यवाही होगी? उन्होंने डीजीएमएस सेफ्टी (डायरेक्टर जनरल ऑफ़ माइंस सेफ्टी) से शिकायत की बात कही है और घटना की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है। साथ ही मजदूरों के लिए पुख्ता सुरक्षा उपाय लागू करने और दोबारा ऐसी दुर्घटनाएं ना हों, इसकी गारंटी सुनिश्चित करने पर बल दिया पूर्व विधायक व ट्रेड यूनियन काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष गुलाब कमरों ने कहा कि यह अब सिर्फ एक मजदूर की मौत नहीं, मजदूर वर्ग की अस्मिता और जीवन की लड़ाई है। इस बार चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए घटना के बाद मजदूर वर्ग में जबरदस्त गुस्सा कि यदि जल्द जांच शुरू नहीं की गई और दोषियों पर कार्यवाही नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। ।।








