अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
सक्ती//धान खरीदी वर्ष 2025–26 के लिए नियुक्त किए गए नवीन डेटा ऑपरेटरों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष पुराने कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते जिला प्रशासन द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से दर्जनों नए ऑपरेटरों का चयन किया गया था। नए ऑपरेटरों से दस्तावेज़ सत्यापन, टाइपिंग टेस्ट व दो दिवसीय प्रशिक्षण भी पूरा कराया गया था।
नवीन ऑपरेटरों का कहना है कि कलेक्टर सभा कक्ष में स्वयं जिला प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया था कि यदि पुराने ऑपरेटर वापस भी आते हैं, तब भी इस वर्ष धान खरीदी का पूरा कार्य नए ऑपरेटरों से ही कराया जाएगा। इस भरोसे के आधार पर सभी युवाओं ने धान खरीदी कार्य के लिए स्वयं को तैयार कर लिया था।
लेकिन अचानक पुराने कर्मचारियों की वापसी के बाद प्रशासन द्वारा बिना किसी सूचना के नई सूची जारी कर दी गई, जिसमें नवीन ऑपरेटरों के नाम शामिल ही नहीं किए गए। इससे युवाओं में रोष व्याप्त है। उनका आरोप है कि “हम बेरोजगार युवाओं को शासन–प्रशासन ने मोहरा बनाकर धोखा दिया है। छह माह का कार्य देने की बात कही गई थी, लेकिन अब हमें पूरी तरह अनदेखा किया जा रहा है।”
युवाओं का कहना है कि संकट की स्थिति में उन्होंने प्रशासन का साथ देने के लिए तत्परता दिखाई थी, लेकिन अब पुराने कर्मचारियों को प्राथमिकता देकर उन्हें हाशिये पर धकेल दिया गया है।
नवीन ऑपरेटरों ने जिला अधिकारी से मांग की है कि—
पूर्व में दिए गए आश्वासन का पालन करते हुए उन्हें धान खरीदी 2025–26 में कार्य करने का अवसर दिया जाए, जिससे बेरोजगार युवाओं को राहत मिल सके और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
युवाओं का कहना है कि यदि उनकी उपेक्षा जारी रही, तो वे सामूहिक रूप से जिला प्रशासन के समक्ष अपने साथ हुए अन्याय को लेकर आवाज़ उठाएंगे।






