सीएम के आने से पहले सड़कों के गड्ढे भरने की कवायद, लेकिन जिस रास्ते से मुख्यमंत्री नहीं गुजरेंगे, वहां अब भी जानलेवा गड्ढे बरकरार; जलभराव और ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लोग
बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बरेली आगमन से पहले शहर की सड़कों के गड्ढे भरने की कवायद तेज दिखाई दे रही है। जिन मार्गों से मुख्यमंत्री का काफिला गुजरने वाला है, वहां सड़कें दुरुस्त की जा रही हैं। लेकिन शहर के दूसरे हिस्सों की तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर दिखा रही है। कोहाड़ापीर से धर्मकांटा रोड पर गड्ढों की भरमार है और लोगों की शिकायतों के बावजूद सड़क की सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा।
सवाल यह है कि क्या शहर की सड़कें सिर्फ मुख्यमंत्री के दौरे के लिए ठीक की जानी चाहिए, या फिर आम जनता को भी सुरक्षित सड़क पर चलने का अधिकार है?
सड़क में गड्ढे या गड्ढों में सड़क, पहचानना मुश्किल
कोहाड़ापीर से धर्मकांटा जाने वाले मार्ग की हालत ऐसी है कि जगह-जगह बने बड़े गड्ढों के बीच सड़क तलाशनी पड़ती है। राहगीरों के लिए यह रास्ता किसी चुनौती से कम नहीं है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को हर कदम पर संभलकर चलना पड़ता है। जरा सी चूक दुर्घटना का कारण बन सकती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, थोड़ी सी बारिश होते ही इस सड़क पर पानी भर जाता है। जलभराव के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देते और वाहन चालक धोखा खा जाते हैं। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के गिरने का खतरा बना रहता है। गड्ढों के चलते वाहनों की रफ्तार भी प्रभावित होती है और सड़क पर जाम की स्थिति पैदा होती है।
बगल में 33 केवी का बिजली उपकेंद्र, सुरक्षा पर भी सवाल
इस मार्ग के किनारे 33 केवी का बिजली उपकेंद्र भी स्थित है। स्थानीय स्तर पर बिजली के खंभों को तिरपाल से लपेटे जाने की बात सामने आई है, ताकि करंट लगने की आशंका से बचा जा सके। ऐसे संवेदनशील स्थान के आसपास सड़क की बदहाली और बारिश के दौरान जलभराव सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ाते हैं। संबंधित विभागों को इस स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने चाहिए।
सीएम ग्रिड योजना का काम जारी, फिर भी गड्ढों से राहत नहीं
क्षेत्र में सीएम ग्रिड योजना के तहत काम चल रहा है, लेकिन इस बीच सड़क पर बने गड्ढों को अस्थायी रूप से भरने तक की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं देना है, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने तक सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना भी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम को कई बार सड़क की समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। सवाल उठता है कि जब शिकायतें पहले से अधिकारियों के संज्ञान में हैं, तो फिर गड्ढों को भरने के लिए मुख्यमंत्री के दौरे का इंतजार क्यों?
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सवालों के घेरे में व्यवस्था
मुख्यमंत्री के आगमन से पहले सड़कों को दुरुस्त करने की गतिविधियां निश्चित रूप से जरूरी हो सकती हैं, लेकिन इससे शहर की बाकी सड़कों की बदहाली को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर किसी वीआईपी के आगमन पर सड़कें रातोंरात सुधारी जा सकती हैं, तो आम नागरिकों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती?
क्या आम जनता की परेशानी अधिकारियों को तभी दिखाई देती है, जब कोई बड़ा दौरा या चुनाव सामने होता है? कोहाड़ापीर–धर्मकांटा रोड की स्थिति ने नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब जवाबदेही तय करने का वक्त
स्थानीय लोगों को आश्वासन नहीं, सड़क के गड्ढों से राहत चाहिए। बारिश में जलभराव रोकने, दुर्घटनाओं की आशंका कम करने और यातायात सुचारु रखने के लिए तत्काल अस्थायी मरम्मत की जरूरत है। सीएम ग्रिड योजना के तहत काम पूरा होने तक भी सड़क को सुरक्षित बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बरेली आगमन से पहले यह सवाल शहर की व्यवस्था के सामने खड़ा है—क्या सड़कें सिर्फ मुख्यमंत्री के काफिले के लिए बनेंगी, या उन पर रोज सफर करने वाली जनता की भी कोई कीमत है?
फिलहाल कोहाड़ापीर से धर्मकांटा रोड पर राहगीरों को राहत मिलने का इंतजार है। नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस समस्या पर कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।






