कैराना। कस्बे के मायापुर रोड क्षेत्र में बुधवार को मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने अवैध कॉलोनी माफियाओं के खिलाफ कड़ा प्रहार करते हुए दो अवैध कॉलोनियों को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। अचानक और सख्त कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया, जबकि गैरकानूनी प्लॉटिंग करने वाले कॉलोनाइजरों और निर्माणकर्ताओं में भगदड़ की स्थिति बन गई। प्रशासन की इस कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि अब बिना अनुमति के निर्माण और अवैध कॉलोनियों का खेल किसी भी कीमत पर नहीं चलने दिया जाएग।
दोपहर करीब एक बजे मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की टीम सहायक अभियंता भरत पाल सिंह तथा अवर अभियंता विनय कुमार गर्ग के नेतृत्व में तीन सदस्य टीम मौके पर पहुंची और बिना किसी देरी के बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। टीम ने उन कॉलोनियों में की गई अवैध प्लॉटिंग, आंतरिक सड़कों और निर्माण कार्य को जमींदोज कर दिया, जो बिना ले-आउट स्वीकृति और नियमानुसार अनुमति के विकसित की जा रही थीं। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में बताया कि संबंधित निर्माणकर्ताओं को पहले ही नोटिस देकर चेतावनी दी जा चुकी थी, इसके बावजूद नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। चेतावनी की अवहेलना पर बुधवार को निर्णायक कार्रवाई अमल में लाई गई। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। किसी भी तरह के विरोध, दबाव या अवरोध की संभावना को देखते हुए नायब तहसीलदार कैराना सतीश यादव, कानूनगो विनोद, लेखपाल अंकित व अभिजीत के साथ भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया और किसी को भी कार्रवाई में बाधा डालने की इजाजत नहीं दी गई। अधिकारियों के अनुसार अभियान पूरी सख्ती के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।
एमडीए अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। अवैध कॉलोनियों, बिना नक्शा स्वीकृति के निर्माण और नियमों के विरुद्ध की जा रही प्लॉटिंग के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। कानून तोड़ने वालों के खिलाफ न केवल ध्वस्तीकरण बल्कि कठोर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। किसी भी स्तर पर अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं मिलेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने आम नागरिकों को भी सख्त लहजे में आगाह किया कि किसी भी मकान या प्लॉट की खरीद से पहले संबंधित विकास प्राधिकरण से उसकी वैधता अनिवार्य रूप से जांच लें। अवैध कॉलोनियों में निवेश करना अपने पैसों को जोखिम में डालने के बराबर है, क्योंकि ऐसी संपत्तियों पर कभी भी बुलडोजर चल सकता है।
कार्रवाई के बाद क्षेत्र में दिनभर हलचल बनी रही। एक ओर अवैध निर्माण से जुड़े लोगों में खलबली मची रही, तो दूसरी ओर आम नागरिकों में यह भरोसा मजबूत हुआ कि अब शहर में गैरकानूनी निर्माण के खिलाफ प्रशासन आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
बीच कार्रवाई छोड़कर चले गए लेखपाल
ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान एक गंभीर घटनाक्रम ने सभी का ध्यान खींचा। बताया गया कि मौके पर मौजूद लेखपाल अंकित व अभिजीत कार्रवाई के बीच में ही स्थल छोड़कर चले गए, जबकि नायब तहसीलदार कैराना सतीश यादव और कानूनगो विनोद मौके पर डटे रहे। वरिष्ठ अधिकारियों को छोड़कर बीच कार्रवाई में चले जाना न केवल अनुशासनहीनता माना जा रहा है, बल्कि इसकी चौतरफा चर्चा भी हो रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों लेखपाल एमडीए द्वारा अवैध कॉलोनियों पर की जा रही सख्त कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे और भूमि विवाद का हवाला देकर ध्वस्तीकरण रुकवाने का प्रयास कर रहे थे। जब विकास प्राधिकरण की टीम ने नियमों के तहत कार्रवाई से पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया, तो कथित रूप से नाराज होकर दोनों लेखपाल कार्रवाई अधूरी छोड़कर मौके से चले गए। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब उच्च अधिकारियों से मामले की समीक्षा की चर्चा भी शुरू हो गई है।






