नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार सुबह अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन यह खबर आई, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपते हुए धनखड़ ने इसके पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, लेकिन सवाल ये है—क्या कहानी सिर्फ इतनी ही है? स्वास्थ्य या संकेत?अपने पत्र में धनखड़ ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों की सलाह पर अब उन्हें “स्वास्थ्य को प्राथमिकता” देनी होगी। बीते महीनों में सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें भी सामने आई थीं। मार्च में उन्हें एंजियोप्लास्टी करानी पड़ी और जून में नैनीताल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें मंच से हटाना पड़ा था।परंतु राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या ये सिर्फ स्वास्थ्य का मामला है, या कहीं कोई और परत भी छुपी है?एक कार्यकाल जिसकी गूंज रही संसद तकधनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पद संभाला था। अपने तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने सदन की गरिमा और अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया। विपक्ष के तीखे तेवरों के बावजूद वे लगातार सख्त लेकिन संतुलित नजर आए। उन्होंने अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू का आभार व्यक्त करते हुए लिखा कि यह कार्यकाल उनके लिए “जीवन का सौभाग्यपूर्ण अनुभव” रहा।कांग्रेस ने खड़े किए सवालकांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “धनखड़ जी का इस्तीफा अचानक नहीं, रणनीतिक लगता है। ज़रूर कुछ ऐसा है जो हमें बताया नहीं गया।”इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र अब उस संभावित घटनाक्रम पर टिक गई है जो आने वाले समय में बड़ा उलटफेर ला सकता है।संविधान क्या कहता है?धनखड़ का इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत हुआ है, जिसके अनुसार उपराष्ट्रपति अपने पद से राष्ट्रपति को लिखित पत्र देकर त्यागपत्र दे सकते हैं। हालांकि इस प्रक्रिया में कोई बाध्यता नहीं होती कि उन्हें कारण सार्वजनिक करना पड़े।अब आगे क्या?अब सवाल यह है कि नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया कितनी तेज़ी से शुरू होगी? क्या सत्ता पक्ष की रणनीति इसके जरिए किसी नए चेहरे को उभारने की है? और क्या विपक्ष इस अवसर को मुद्दा बनाकर सियासी मोर्चा खोलेगा?अंत में एक सच्चाईधनखड़ का जाना केवल एक संवैधानिक पद का खाली होना नहीं है — यह उस दौर का अंत है जिसमें उन्होंने विपक्ष से टकराते हुए भी एक संस्थान की मर्यादा को बचाए रखा। पर अब जब उन्होंने खुद कहा है कि “स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता है”, तो देश को ये भी समझना होगा कि जिम्मेदारियों के साथ कभी-कभी खुद की देखभाल भी एक
जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से अचानक दिया इस्तीफा, स्वास्थ्य कारण या कुछ और?






