भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि धनखड़ ने खुद इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि उन्हें पूंजीपतियों के दबाव में हटाया गया। टिकैत का आरोप है कि धनखड़ गांव, गरीब और किसानों की आवाज़ बनकर खड़े होते थे – और यही बात सत्ता में बैठे लोगों को रास नहीं आई।
टिकैत ने तंज कसते हुए कहा कि आज राजनीति पूंजीपतियों के शिकंजे में है, और नेताओं की भूमिका उम्र के हिसाब से तय की जा रही है। “50 साल से कम उम्र वालों को दुष्यंत चौटाला जैसा बना दिया जाता है, और उससे बड़े लोगों को सतपाल मलिक या जगदीप धनखड़ बना कर किनारे कर दिया जाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस बार ढोल किसी और के दरवाज़े पर बजेगा, इशारा सत्ता परिवर्तन की ओर था।





