देश के अगले उपराष्ट्रपति को लेकर सियासी घमासान अब ज़ोर पकड़ चुका है। निर्वाचन आयोग ने तारीखें तय कर दी हैं— 22 अगस्त नामांकन की आखिरी तारीख और 9 सितंबर को वोटिंग होगी। खास बात ये है कि इस चुनाव में सिर्फ सांसद ही वोट डालते हैं—लोकसभा और राज्यसभा, दोनों के। कुल 782 सांसदों के हाथ में होगा तय करना कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 392 प्राथमिक वोट चाहिए होंगे। ऐसे में ये लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं, रणनीति और संख्याबल की भी है।
अब अगर नज़र डालें मौजूदा समीकरणों पर, तो साफ दिखता है कि बाज़ी फिलहाल एनडीए के हाथ में जाती दिख रही है। लोकसभा में उनके पास 293 और राज्यसभा में 125 सांसदों का समर्थन है—यानि कुल 418 वोटों के साथ वो बहुमत के पार हैं। दूसरी ओर, INDIA गठबंधन के पास करीब 339 वोट हैं, जो कि मुकाबले में कम हैं। कुछ मनोनीत और निर्दलीय सांसदों का रुख अभी स्पष्ट नहीं है, और यही 10-12 वोट अब गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। कुल मिलाकर, उपराष्ट्रपति की ये जंग भले ही आंकड़ों में तय लगती हो, लेकिन राजनीति में आखिरी मोड़ तक कुछ भी मुमकिन है। अब देखना ये है कि गणित भारी पड़ेगा या गठबंधन की चालें?






