रिपोर्ट—रजत मल्होत्रा
चंदौसी— गौशाला में जलभराव के दौरान संरक्षित गोवंशों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था में लापरवाही और बिना अनुमति दूसरे विकासखंड की गौशाला में भ्रमण करने के आरोप में ग्राम पंचायत अधिकारी पर कार्रवाई की गाज गिरी है। जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल के अनुमोदन के बाद जिला पंचायती राज अधिकारी ग्रीश कुमार ने विकासखंड बनियाखेड़ा में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी महेश सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
ग्राम पंचायत नेहटा स्थित गौ-आश्रय स्थल में जलभराव की स्थिति बनने पर संरक्षित गोवंशों को अन्यत्र स्थानांतरित करने के संबंध में शासन के निर्देशों और अपेक्षित व्यवस्थाओं का अनुपालन नहीं किए जाने का आरोप महेश सिंह पर लगाया गया है। विभागीय आदेश में इसे शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही माना गया है। इसके अलावा बनियाखेड़ा विकासखंड में तैनाती के बावजूद गुन्नौर विकासखंड की ग्राम पंचायत कला स्थित गौशाला में अनधिकृत रूप से भ्रमण करने का भी आरोप है।
बताया गया है कि पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. पटेल ने उक्त गौशाला के भ्रमण के लिए स्पष्ट रूप से मना किया था। इसके बावजूद वहां जाने के मामले को विभाग ने गंभीरता से लिया। आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत अधिकारी पर अपने पदीय एवं शासकीय दायित्वों का समुचित निर्वहन न करने, घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों को उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1999 के प्रावधानों के विपरीत मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई।
बहजोई विकासखंड से संबद्ध किया गया: निलंबन अवधि में महेश सिंह को विकासखंड बहजोई से संबद्ध किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। इसके लिए उन्हें प्रमाण-पत्र देना होगा कि वह किसी अन्य सेवा, योजना, व्यापार-वृत्ति या व्यवसाय में नियोजित नहीं हैं। विभागीय जांच के आदेश: मामले की अनुशासनात्मक एवं विभागीय जांच के लिए सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), संभल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच में आरोपों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।






