अधूरे निर्माण पर विभाग की चुप्पी क्यों? सरकारी धन खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को नहीं मिल रहा योजना का लाभ, जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।
करतला (कोरबा)। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, ताकि लोगों को पानी के लिए भटकना न पड़े। लेकिन कोरबा जिले के करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलझर में इस योजना की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहां लाखों रुपये की लागत से बनाई जा रही पानी टंकी लंबे समय से अधूरी पड़ी होने की बात सामने आ रही है। निर्माण स्थल की तस्वीरें देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजना का काम अभी तक अपने निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाया है।
कागजों में योजना, जमीन पर अधूरा निर्माण!
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पानी टंकी का निर्माण पूरा होते ही उनके घरों तक नल के माध्यम से पेयजल पहुंचेगा। लेकिन निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारण इस सुविधा का लाभ अब तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर शासन की महत्वपूर्ण योजना का काम पूरा कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
आखिर जवाबदेही किसकी?
सबसे बड़ा सवाल संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर है। पानी टंकी निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई? निर्माण कार्य कब शुरू हुआ और इसे पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा क्या थी? यदि ठेकेदार ने समय पर काम पूरा नहीं किया तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? क्या संबंधित अधिकारियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया है? यदि किया है तो अधूरे निर्माण पर अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?
इन सवालों का जवाब ग्रामीणों को मिलना चाहिए। क्योंकि सरकारी योजनाओं में जनता का पैसा खर्च होता है और उसकी जवाबदेही भी जनता के प्रति ही तय होनी चाहिए।
अधूरी टंकी नहीं, ग्रामीणों की उम्मीदें भी अधर में!
फुलझर के ग्रामीणों के लिए पानी टंकी केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि स्वच्छ पेयजल की उम्मीद है। जब गांव में पानी पहुंचाने के लिए योजना स्वीकृत हुई तो लोगों ने सोचा था कि अब पेयजल की समस्या से मुक्ति मिलेगी। लेकिन अधूरा निर्माण ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फेरता नजर आ रहा है।
विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे सवाल
- ग्राम फुलझर की पानी टंकी का निर्माण अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ?
- इस निर्माण कार्य के लिए कितनी शासकीय राशि स्वीकृत और व्यय की गई है?
- निर्माण पूरा करने की समय-सीमा क्या निर्धारित की गई थी?
- कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?
- ग्रामीणों के घरों तक नियमित नल से पानी कब पहुंचेगा?
अब कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके का निरीक्षण करें, निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं प्रगति की जांच कराएं और जिम्मेदारी तय करते हुए अधूरी पानी टंकी का निर्माण शीघ्र पूरा कराएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि नल-जल योजना का लाभ ग्रामीणों को आखिर कब से मिलेगा।
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य शुरू कराना नहीं, बल्कि उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। यदि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को पेयजल की सुविधा नहीं मिलती, तो यह निश्चित रूप से गंभीर जांच का विषय है।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग के अधिकारी इस खबर को संज्ञान में लेकर फुलझर गांव पहुंचते हैं और ग्रामीणों की समस्या का समाधान कराते हैं या फिर अधूरी पड़ी पानी टंकी सरकारी व्यवस्था की लापरवाही की एक और मिसाल बनकर रह जाती है।
अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
एक्सप्रेस न्यूज़ भारत | बिलासपुर संभाग हेड





