Sat. Mar 6th, 2021

Express News Live

ज़िद !! सच दिखने की

Farmersprotest: 53वा दिन’संयुक्त किसान मोर्चा की आज अहम बैठक-लिए जाएंगे..

नई दिल्ली : किसानों के आंदोलन का आज 53वां दिन है। हड्डियां गला देने वाली ठंड के बीच  कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसान किसी कीमत पर अपनी मांगें मनवाए बिना वापस जाने के मूड में नहीं हैं। वहीं सरकार भी अपने रूख पर अड़ी है। किसान संगठनों और सरकार के बीच अबतक 10 दौर की बैठक हो चुकी है लेकिन अबतक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। अब दोनों पक्षों के बीच 19 जनवरी को फिर फिर बातचीत होगी।

वहीं किसान संगठन के प्रतिनिधि आज एकबार फिर बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में 19 जनवरी को सरकार से साथ होने वाली वार्ता और आज 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च के प्लान, रूट और रणनीति पर चर्चा करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा की यह बैठक सिंघु बॉर्डर पर दोपहर एक बजे शुरु होगी। 

इन सब के बीच गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में ट्रैक्टर परेड को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट तीनों कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली और दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों को हटाने संबंधी याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच बने गतिरोध को तोड़ने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले को सुलझाने के लिए 4 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। लेकिन किसानों का कहना है कि वो कमेटी के सामने हाजिर नहीं होंगे। 

वहीं किसान 26 जनवरी के अपने प्रस्तावित ‘किसान परेड’ के कार्यक्रम पर अमल करने और दिल्ली कूच करने पर अड़े। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा घोषित आंदोलन के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाने, 20 जनवरी को श्री गुरु गोविंद सिंह की याद में शपथ लेने और 23 जनवरी को आजाद हिंद किसान दिवस पर देश भर में राजभवन का घेराव करने का कार्यक्रम जारी रहेगा।

आपको बता दें कि कड़ाके की सर्दी और  गिरते पारे के साथ-साथ कोरोना के खतरों के बीच 26 नवंबर से बड़ी तादाद में किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर डटे हैं। लेकिन किसान और सरकार के बीच अबतक इस मसले पर अबतक कोई सहमति नहीं बन पाई है। बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारी किसान सिंधु, टिकरी, पलवल, गाजीपुर सहित कई बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इस आंदोलन की वजह से दिल्ली की कई सीमाएं सील हैं।

Share
Now