मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस हिरासत से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। किसान नेता दिग्विजय भाटी ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा किया गया कि हिरासत के दौरान उन्हें अपमानित किया गया और गाने पर डांस करने के लिए मजबूर किया गया।
मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के नेता अतुल प्रधान ने घटना को लेकर पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
आरोपों के बाद पुलिस महकमे में कार्रवाई
विवाद सामने आने के बाद मेरठ के नए SSP ने मामले को गंभीरता से लिया। सिविल लाइंस थाना प्रभारी इंस्पेक्टर समेत कुल आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है।
यह कार्रवाई फिलहाल दोष साबित होने के तौर पर नहीं, बल्कि मामले की जांच के बीच प्रशासनिक कदम के रूप में सामने आई है।
किसान नेता ने क्या आरोप लगाए?
दिग्विजय भाटी का आरोप है कि पूछताछ के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
उनके मुताबिक, कथित मारपीट के बाद उन्हें एक फिल्मी गाने पर डांस करने के लिए मजबूर किया गया। इस आरोप के सामने आने के बाद मामले को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस का पक्ष भी सामने आया
मामले में पुलिस की ओर से अलग पक्ष बताया गया है। पुलिस ने आरोपों को गलत बताया और दावा किया कि संबंधित लोगों को पहले से आपराधिक मामलों में नामजद किया गया है। चोटों को लेकर भी पुलिस ने अलग वजह बताई है।
ऐसे में मामले में आरोप और पुलिस का पक्ष एक-दूसरे से अलग हैं।
DIG करेंगे पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सहारनपुर रेंज के DIG को सौंपी गई है। जांच के दौरान हिरासत, पूछताछ, कथित मारपीट और पुलिसकर्मियों की भूमिका से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।
अब आगे क्या?
आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किए जाने के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अब निगाह जांच रिपोर्ट पर है।
अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर आगे की कार्रवाई हो सकती है। वहीं, जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर तस्वीर अलग हो सकती है।
फिलहाल मेरठ का यह मामला पुलिस हिरासत में लोगों के साथ व्यवहार और पुलिस की जवाबदेही को लेकर चर्चा में बना हुआ है।





