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उत्कृष्ट शोध के लिए डाइट झालरापाटन का राष्ट्रीय स्तर पर चयन: एनसीईआरटी पोर्टल पर मिलेगी पहचान

झालावाड़ से ब्यूरो चीफ आसिफ शेरवानी की रिपोर्ट

झालावाड़/झालरापाटन
शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों, संवेगात्मक संतुलन और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) झालरापाटन ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली द्वारा डाइट झालरापाटन के सत्र 2025-26 के जिला स्तरीय शोध कार्य का चयन राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट शोध के रूप में किया गया है। इस शोध को राष्ट्रीय संकलन व पोर्टल पर स्थान मिलने से झालावाड़ जिले के शैक्षिक नवाचारों को पूरे देश में विशेष पहचान मिलेगी।
इन अधिकारियों के नेतृत्व में हुआ शोध
यह महत्वपूर्ण अनुसंधान डाइट प्राचार्य श्रीमती रजनीगंधा सोनी, पूर्व शोध प्रभागाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार जैन के कुशल मार्गदर्शन व नेतृत्व में संचालित किया गया था। इस शोध कार्य को डाइट की वार्षिक शोध पत्रिका ‘सिद्धि’ (द्वितीय संस्करण) में भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।
चार सदस्यीय शोध दल ने पूरा किया अध्ययन
प्रभागाध्यक्ष श्री राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि शोध अध्ययन को डाइट के चार शिक्षकों की टीम ने अमलीजामा पहनाया:
राधेश्याम वर्मा (प्राध्यापक, राबाउमावि/राउमावि सिरपोई)
राहुल गुप्ता (अध्यापक लेवल-2, राउमावि कड़ोदिया)
रक्षा अग्रवाल (अध्यापक लेवल-2, राउप्रावि चौकी जरेल)*
कपिला जोजन (अध्यापक लेवल-2, राउप्रावि चंगेरी)*

जिले के 8 ब्लॉकों के 317 शिक्षक-विद्यार्थी बने अध्ययन का हिस्सा
शोध दल के राहुल गुप्ता ने बताया कि यह अनुसंधान झालावाड़ जिले के सभी आठों ब्लॉकों (झालरापाटन, अकलेरा, बकानी, भवानीमंडी, डग, खानपुर, मनोहरथाना एवं सुनेल) में विवरणात्मक सर्वेक्षण विधि द्वारा पूरा किया गया। इसमें कक्षा 8 से 12 तक पढ़ाने वाले 141 शिक्षकों और अध्ययनरत 176 विद्यार्थियों (कुल 317 प्रतिभागियों) से 5-बिंदु लिकर्ट स्केल आधारित प्रश्नावली और गूगल फॉर्म्स के माध्यम से वैज्ञानिक व सांख्यिकीय आंकड़े जुटाए गए।
मुख्य निष्कर्ष: मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई में सीधा और गहरा संबंध

  1. मजबूत धनात्मक सह-संबंध (r = 0.675): सांख्यिकीय विश्लेषण से प्रमाणित हुआ कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी शैक्षिक उत्पादकता के बीच अत्यंत गहरा धनात्मक सह-संबंध है। मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होने पर सीखने की दक्षता, एकाग्रता और समय प्रबंधन में सीधा सुधार दिखता है।
  2. मानसिक स्तर का वर्गीकरण: अध्ययन में शामिल विद्यार्थियों में से 47.16% उच्च मानसिक स्वास्थ्य स्तर पर, 40.91% मध्यम स्तर पर और 11.93% निम्न स्तर पर पाए गए।
  3. कमजोर मानसिक स्वास्थ्य का असर: निम्न स्तर वाले लगभग 31% विद्यार्थी अत्यधिक तनाव, चिंता और थकावट के कारण पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में गंभीर परेशानी महसूस करते हैं।
  4. उजागर हुआ ‘सहानुभूति अंतराल’ (Empathy Gap): शोध में शिक्षकों और विद्यार्थियों के दृष्टिकोण में सांख्यिकीय अंतर (t = 1.97) सामने आया। शिक्षक जहां उत्पादकता में गिरावट को अक्सर अनुशासन या आलस्य से जोड़कर देखते हैं, वहीं विद्यार्थी इसे पारिवारिक अपेक्षाओं के दबाव, मानसिक थकान और भावनात्मक अकेलेपन का कारण मानते हैं। 38% से अधिक शिक्षकों ने भी यह स्वीकारा कि कक्षाओं में बच्चों के अंदर तनाव व चिंता के लक्षण स्पष्ट दिखते हैं।
    प्रमुख सिफारिशें ও भावी नीतिगत सुझाव
    शोध दल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप कई व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:
    1.विद्यालयी परामर्श केंद्र: प्रत्येक माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय में योग्य काउंसलर (परामर्शदाता) की नियुक्ति और 24×7 हेल्पलाइन की सुविधा हो।
  5. दैनिक माइंडफुलनेस: प्रार्थना सभा और कक्षाओं में प्रतिदिन 10-15 मिनट ध्यान, प्राणायाम व भावनात्मक संतुलन पर चर्चा हो।
  6. शिक्षकों को साइकोलॉजिकल फर्स्ट-एड: शिक्षकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण में मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता जोड़ी जाए, जिससे शिक्षक-छात्र संवाद भयमुक्त और आत्मीय बन सके।
  7. अभिभावकों की काउंसलिंग: पीटीएम (PTM) में माता-पिता को बच्चों की7 आपस में तुलना न करने और अपेक्षाओं का अनावश्यक बोझ न डालने के प्रति जागरूक किया जाए।
    शिक्षा जगत में खुशी की लहर
    प्रभागाध्यक्ष श्री राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि डाइट झालरापाटन के इस शोध पत्र के राष्ट्रीय स्तर पर चयनित होने पर जिले के sशिक्षा अधिकारियों, डाइट फैकल्टी और शिक्षकों ने शोधकर्ताओं को बधाई दी और इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
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