कोटद्वार दीपक का नाम एक बार फिर चर्चा में है, जिसने कथित तौर पर मुस्लिम बनकर एक बुजुर्ग दुकानदार को भीड़ के गुस्से से बचाया था। अब दीपक ने 2 लाख रुपये का घोषित इनाम लेने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने जो किया, वह किसी लालच या प्रसिद्धि के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत के नाते किया।मामला उस समय का है जब बाजार में तनाव की स्थिति बन गई थी और एक बुजुर्ग दुकानदार को कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दीपक मौके पर पहुंचे और खुद को मुस्लिम बताते हुए भीड़ को शांत करने की कोशिश की। इससे हालात काबू में आए और बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।घटना के बाद कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने दीपक के साहस की सराहना करते हुए उन्हें 2 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। लेकिन दीपक ने सार्वजनिक रूप से यह राशि लेने से इनकार कर दिया।दीपक ने कहा, “अगर किसी की जान बचाने के बदले पैसे ले लूं तो वो मदद नहीं, सौदा हो जाएगा। मैंने जो किया, वो सिर्फ एक इंसान होने के नाते किया।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज को धर्म और पहचान से ऊपर उठकर एक-दूसरे का साथ देना चाहिए।स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपक के इस फैसले ने उन्हें और सम्मान दिलाया है। कई व्यापारियों ने भी इस कदम को सकारात्मक संदेश बताया और कहा कि ऐसे उदाहरण ही सामाजिक सौहार्द को मजबूत करते हैं।हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि पूरी घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि अफवाहों और गलतफहमियों पर विराम लगे। प्रशासन की ओर से फिलहाल शांति बनाए रखने की अपील की गई है।यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि क्या हम मुश्किल वक्त में धर्म देखेंगे या इंसानियत? दीपक का संदेश साफ है—मदद की न कोई जात होती है, न कोई मजहब।






