Home / Politics / तहसील आओ, फोटो खिंचवाओ…तभी मिलेगी पूड़ी बांदा में बाढ़ राहत बनी मज़ाक….

तहसील आओ, फोटो खिंचवाओ…तभी मिलेगी पूड़ी बांदा में बाढ़ राहत बनी मज़ाक….

बाढ़ प्रभावित लोग खुले आसमान के नीचे पॉलिथीन या खेतों में रह रहे हैं क्योंकि उन्हें अभी तक पर्याप्त राशन या आर्थिक मदद मिली ही नहीं बुंदेलखंड किसान यूनियन ने दावा किया कि बांदा में लगभग 30,000 हेक्टेयर जमीन और 1500 से अधिक घर बरबाद हुए, लेकिन सरकारी राहत कोष में धन नहीं, सर्वे तक नहीं हुआ

राशन खत्म, रात भूखे बिताई गई

  • गाँवों के लोग पाँच दिनों से खुले में, बीमारियों और भूख के साथ गुज़ार रहे हैं। राशन खत्म हो चुका है और बच्चों को दो दिनों से केवल नमक-मिश्रित चावल खाने पड़ रहे हैं।
  • राशन लेने के लिए लोग जान जोखिम में डालकर नाव से पार कर रहे हैं, कई परिवारों ने रात को खुले में बिताई है

सर्वे टीम अक्सर बिना सही नुकसान के आंकलन के मुआवजा बांट रही है—जिससे प्रभावितों तक उचित सहायता नहीं पहुँच रही राज्य विश्वविद्यालयों और सामाजिक संगठनों के अनुसार, राहत कार्य केवल ताबूत सजाने की नौटंकी है; जमीन पर कोई तैयारियाँ नहीं दिखाई देतीं

बांदा में बाढ़ पीड़ितों को महज खानापूर्ति जैसे दिखावे के तहत सिमित राशन, घटिया सहायता या ऊंट के मुंह में जीरे जैसी आर्थिक मदद दी जा रही है, जबकि ज़रूरत वास्तविक और बहुआयामी है — जीवनयापन, स्वास्थ्य, पुनर्वास और सही मुआवजा। प्रशासन की उदासीनता और घोर लापरवाही ने प्रभावित परिवारों को कागज़ों तक सीमित राहत में दिया है, जमीन पर नहीं।

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