इज्जतनगर थाने की बैरियर-2 चौकी के तत्कालीन प्रभारी पर शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप, 50 हजार रुपये मांगने और 20 हजार रुपये लेने का दावा; पुलिस जांच और संबंधित दरोगा का पक्ष आना बाकी*
बरेली। जिले के इज्जतनगर थाना क्षेत्र में दर्ज एक मुकदमे की विवेचना को लेकर तत्कालीन चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक इंद्रपाल सिंह के खिलाफ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की गई है। ग्राम मुड़िया अहमद नगर निवासी एजाज अहमद ने आरोप लगाया है कि मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर उनसे पहले 50 हजार रुपये मांगे गए और बाद में कथित तौर पर 20 हजार रुपये लिए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि रकम देने के बावजूद संबंधित मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट नहीं लगी और रुपये भी वापस नहीं मिले। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र या विभागीय जांच से पुष्टि नहीं हुई है।
दरोगा इंद्रपाल सिंह के खिलाफ एसएसपी को दिया प्रार्थना पत्र
एजाज अहमद ने 21 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बरेली के नाम प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत पत्र के अनुसार, थाना इज्जतनगर में दर्ज मुकदमा संख्या 143/2024 की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक इंद्रपाल सिंह द्वारा की जा रही थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विवेचना के दौरान मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने को लेकर उनसे धनराशि की मांग की गई।
प्रार्थना पत्र में संबंधित मुकदमे की धाराओं का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, मुकदमे की वर्तमान स्थिति और विवेचना संबंधी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
50 हजार रुपये मांगने और 20 हजार लेने का दावा
एजाज अहमद के मुताबिक, दरोगा इंद्रपाल सिंह ने कथित तौर पर उनसे कहा था कि मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगवाने के लिए 50 हजार रुपये खर्च करने होंगे।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इतनी रकम देने में असमर्थता जताई। उनके अनुसार, बातचीत के बाद 20 हजार रुपये देने की बात तय हुई।
एजाज अहमद ने दावा किया कि वह अपने अधिवक्ता के साथ दरोगा इंद्रपाल सिंह से मिले और अधिवक्ता की मौजूदगी में कथित तौर पर 20 हजार रुपये नकद दिए।
यह शिकायतकर्ता का पक्ष है। कथित लेनदेन के समर्थन में किसी स्वतंत्र साक्ष्य या संबंधित अधिवक्ता का बयान फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
रकम देने के बाद भी फाइनल रिपोर्ट नहीं लगने की शिकायत
एजाज अहमद का आरोप है कि कथित भुगतान के बाद भी उनके मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट नहीं लगाई गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में कई बार दरोगा इंद्रपाल सिंह से संपर्क किया। उनका दावा है कि हर बार कुछ समय इंतजार करने को कहा गया।
बाद में उन्हें जानकारी मिली कि संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बाद उन्होंने अपनी कथित तौर पर दी गई रकम वापस मांगनी शुरू की।
हालांकि, मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट न लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि विवेचना अभिलेखों और पुलिस के आधिकारिक पक्ष से ही हो सकेगी। किसी मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्णय साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।
रुपये वापस नहीं मिलने का भी आरोप
एसएसपी को दिए शिकायती पत्र में एजाज अहमद ने कहा है कि रकम वापस मांगने पर उन्हें आश्वासन दिया गया, लेकिन रुपये नहीं लौटाए गए।
शिकायतकर्ता का दावा है कि लगातार संपर्क करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें दरोगा इंद्रपाल सिंह के दूसरे जिले में स्थानांतरित होने की जानकारी मिली है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
दरोगा का पक्ष और पुलिस की जांच महत्वपूर्ण
इस प्रकरण में उपनिरीक्षक इंद्रपाल सिंह का पक्ष सामने आना आवश्यक है। शिकायतकर्ता के आरोपों के संबंध में दरोगा की प्रतिक्रिया और पुलिस विभाग का आधिकारिक बयान फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
मामले की निष्पक्ष जांच में कथित लेनदेन, अधिवक्ता की मौजूदगी के दावे, विवेचना अभिलेखों और मुकदमे की वर्तमान स्थिति की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है।
यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि शिकायत पर विभागीय स्तर पर कोई जांच शुरू हुई है या नहीं।
निष्पक्ष जांच और रकम वापस दिलाने की मांग
एजाज अहमद ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से प्रकरण की जांच कराकर कथित तौर पर दिए गए 20 हजार रुपये वापस दिलाने की मांग की है।
फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। दरोगा इंद्रपाल सिंह के विरुद्ध किसी विभागीय कार्रवाई, दोष सिद्ध होने या आरोपों की पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
ऐसे में संबंधित पुलिसकर्मी का पक्ष, उपलब्ध साक्ष्य और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।






