लंबे समय से फरार चल रहा था आरोपी साहिब, पुलिस ने 310 ग्राम नाजायज स्मैक के साथ किया गिरफ्तार; उत्तराखंड में भी दर्ज हैं मुकदमे, पहले जा चुका है जेल
बरेली। जनपद बरेली में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना मीरगंज पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे 20 हजार रुपये के इनामी आरोपी साहिब पुत्र छंगा को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से 310 ग्राम नाजायज स्मैक बरामद हुई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई गई है। आरोपी के खिलाफ बरेली के अलावा उत्तराखंड में भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
लंबे समय से पुलिस को थी आरोपी की तलाश
पुलिस के अनुसार, 22 अप्रैल 2026 को तत्कालीन उपनिरीक्षक पंकज कुमार की फर्द के आधार पर थाना मीरगंज में मुकदमा संख्या 171/26, धारा 8/21/29 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मुकदमे में सलीम पुत्र शकील, नवेद पुत्र निहालुद्दीन, गुलाब उर्फ गुलब्बा पुत्र मंजील, दानिश पुत्र शराफत और नासिर पुत्र जिलेदार खां को नामजद किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले से संबंधित कई आरोपियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है, जबकि ग्राम गुलड़िया निवासी साहिब पुत्र छंगा फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी, लेकिन वह पुलिस की पकड़ से बच रहा था।
एसएसपी ने घोषित किया था 20 हजार रुपये का इनाम
आरोपी की लगातार फरारी को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली ने 5 नवंबर 2026 को उसकी गिरफ्तारी पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इनाम घोषित होने के बाद पुलिस और एसओजी टीम ने उसकी तलाश तेज कर दी।
7 नवंबर को मीरगंज पुलिस टीम ने एसओजी के सहयोग से मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए आरोपी साहिब को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे रात करीब 8:10 बजे हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 310 ग्राम स्मैक बरामद होने का दावा किया गया है।
इस बरामदगी के आधार पर थाना मीरगंज में मुकदमा संख्या 539/26, धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट के तहत एक अन्य मामला दर्ज किया गया है।
पूछताछ में स्मैक तस्करी से जुड़े खुलासे
पुलिस पूछताछ में करीब 25 वर्षीय साहिब ने बताया कि वह पिछले कुछ वर्षों से स्मैक बेचने का काम कर रहा था। उसके मुताबिक, वह आसपास के इलाकों से स्मैक खरीदकर नशे के आदी लोगों को बेचता था।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह पहले मजदूरी और ईंट-भट्ठे पर काम करता था। पुलिस के अनुसार, वह पूर्व में उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में भी जेल जा चुका है। मीरगंज थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद वह गिरफ्तारी से बचने के लिए इधर-उधर छिप रहा था।
बरेली और उत्तराखंड में पांच मुकदमों का रिकॉर्ड
पुलिस द्वारा जारी आपराधिक इतिहास के अनुसार, आरोपी साहिब के खिलाफ कुल पांच मुकदमों का विवरण सामने आया है। इनमें दो मामले थाना मीरगंज, बरेली में दर्ज हैं। इसके अलावा उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के थाना पथरी, खानपुर और सिडकुल में भी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं।
पुलिस अब आरोपी के मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त से जुड़े संपर्कों और संभावित नेटवर्क की जांच कर सकती है। बरामद स्मैक के स्रोत और आपूर्ति से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान भी विवेचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
एसओजी और मीरगंज पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
इस गिरफ्तारी में प्रभारी एसओजी निरीक्षक सुनील कुमार की सहयोगी टीम और थाना मीरगंज के कार्यवाहक प्रभारी अमित कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम में कांस्टेबल अंकुर कुमार और कांस्टेबल रजत मलिक भी शामिल रहे।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।
बरेली पुलिस की इस कार्रवाई से मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान को सफलता मिली है। हालांकि, स्मैक की आपूर्ति करने वाले अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क का खुलासा होना अभी बाकी है।





