रामपुर, उत्तर प्रदेश।
पांच साल जेल में बिताने के बाद जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां बुधवार दोपहर पहली बार घर से बाहर निकले, तो उनके चेहरे पर थकान और अनुभव की गहराई साफ झलक रही थी। एक लंबा राजनीतिक और व्यक्तिगत संघर्ष झेल चुके आजम खां ने घर से निकलते ही सबसे पहले अपने समर्थकों से मुलाकात की, फिर मीडिया से बातचीत की।
उनकी आवाज़ में नरमी थी, लेकिन बातों में साफ़ और तीखा संदेश —
“हम बिकाऊ नहीं हैं… हमारा भी चरित्र है।”
“जेल ने सब कुछ बदल दिया…”
मीडिया से बात करते हुए आजम खां ने माना कि पिछले पांच साल उनकी जिंदगी के सबसे कठिन सालों में से रहे।
“जेल में रहते-रहते मैं मोबाइल चलाना तक भूल गया हूं। जिंदगी अब वैसी नहीं रही जैसी पहले थी।”
उनकी बातों में न शिकायत थी, न शिकवा — सिर्फ अनुभव और एक गहरी चुप्पी, जो सब कुछ कह रही थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का भी आभार जताया और कहा कि
“अखिलेश जी ने मेरे बारे में बोलकर मेरा हौसला बढ़ाया, मैं उनका शुक्रगुजार हूं।”
“जो नहीं आए, उनसे कोई नाराज़गी नहीं…”
आजम खां ने जेल के दौरान उन नेताओं का भी ज़िक्र किया जो उनसे मिलने नहीं आए। लेकिन इसके बावजूद उनके मन में कोई कटुता नहीं दिखी।
“मैं चाहता हूं वे खुश रहें, समृद्ध रहें।”
फिर एक हल्की मुस्कान के साथ तंज भी कस दिया:
“जिन लोगों ने पहले मुझे नहीं पहचाना था, अब वे दर्ज मुकदमों के कारण मुझे पहचानने लगे हैं।”
बसपा में जाने की बात पर भावुक जवाब
पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि आजम खां बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में जा सकते हैं। लेकिन उन्होंने इस पर साफ शब्दों में कहा:
“हम बिकाऊ नहीं हैं। हमारा भी चरित्र है।”
उनका यह जवाब न सिर्फ राजनीतिक हलकों में गूंज रहा है, बल्कि उनके समर्थकों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि आजम अब भी अपने उसूलों पर कायम हैं।
“अब सोच बदल चुकी है…”
आजम खां ने साफ संकेत दिए कि जेल जीवन ने उन्हें पूरी तरह बदल दिया है।
“अब मैं नई सोच के साथ आगे बढ़ूंगा। बहुत कुछ सीखा है इन वर्षों में…”
उनके लहजे में बदलाव की झलक थी — एक ऐसा नेता, जो वक्त की ठोकरें खाकर फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहा है।
शत्रु संपत्ति मामले में अगली सुनवाई एक अक्टूबर को
आजम खां के खिलाफ दर्ज शत्रु संपत्ति मामले की सुनवाई बुधवार को टल गई, क्योंकि गवाह कोर्ट में नहीं पहुंचा। यह मामला वर्ष 2019 में रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज हुआ था, जिसमें आरोप है कि विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए इमामुद्दीन कुरैशी की संपत्ति को आजम खां ने कथित रूप से फर्जीवाड़ा कर जौहर यूनिवर्सिटी में मिलाने की कोशिश की।
इस केस में उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा समेत कई और लोग आरोपी हैं। अब अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।






