अफगानिस्तान के तालिबान सरकार के विदेश मंत्री मौलाना आमिर खान मुत्ताकी आज भारत के सबसे प्रतिष्ठित इस्लामी शिक्षण संस्थान, दारुल उलूम देवबंद पहुंचे। उनका स्वागत करने के लिए संस्थान ने 15 प्रमुख उलमा को तैनात किया था और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मुत्ताकी का काफिला दिल्ली से सुबह साढ़े आठ बजे रवाना हुआ और करीब 12 बजे देवबंद पहुंचा। रास्ते में बड़ी संख्या में मदरसे के छात्रों ने हाथ हिला कर और मुस्कुराकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जो इस यात्रा को और भी यादगार बना रहा था।

बता दे की दारुल उलूम में उनका स्वागत मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी की देखरेख में किया गया। मुत्ताकी ने लाइब्रेरी में हदीस का सबक लिया और इसे पढ़ाने की इजाजत प्राप्त की। इस इजाजत के बाद उनके नाम के साथ ‘कासमी’ जुड़ गया, जिससे अब वे अपना पूरा नाम ‘मौलाना आमिर खान मुत्ताकी कासमी’ लिख सकेंगे। यह पल उनके लिए बेहद खास था और सबक लेने के बाद उनके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।
साथ ही बता दे की सबक पूरा करने के बाद मौलाना मुत्ताकी मेहमानखाने में आराम करने गए। उन्हें दो बजकर 30 मिनट पर छात्रों को संबोधित करना था, लेकिन भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों से यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली लौटने का फैसला किया। यह दौरा छात्रों और उलमा दोनों के लिए यादगार अनुभव साबित हुआ, वहीं मुत्ताकी के लिए भी यह शिक्षा और अनुभव का एक महत्वपूर्ण क्षण रहा।






