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शासकीय प्राथमिक शाला मुडापारा में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल, निरीक्षण के दौरान एक भी बच्चा नहीं मिला, किचन में लटका मिला ताला

अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
पहली से पांचवीं तक की 17 दर्ज संख्या वाले बच्चों की पढ़ाई एक ही कमरे में संचालित, सहायक शिक्षक की उपस्थिति को लेकर प्रधान पाठक के बयान में विरोधाभास; ग्रामीणों ने लगाया समय पर स्कूल नहीं पहुंचने और समय से पहले छुट्टी देने का आरोप
करतला//विकासखंड करतला अंतर्गत संकुल केंद्र केराकछार क्षेत्र में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला मुडापारा की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने, विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा बच्चों को पौष्टिक नाश्ता एवं मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लेकिन शासकीय प्राथमिक शाला मुडापारा में सामने आई स्थिति इन व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। विद्यालय में बच्चों की कुल दर्ज संख्या 17 बताई गई है, लेकिन 31 अक्टूबर 2026 को शनिवार सुबह निरीक्षण के दौरान एक भी बच्चा विद्यालय में उपस्थित दिखाई नहीं दिया। कक्षाएं खाली नजर आईं और विद्यालय के किचन में ताला लटका मिला। वहीं सहायक शिक्षक की उपस्थिति को लेकर प्रधान पाठक और संकुल समन्वयक से मिली जानकारी में भी विरोधाभास सामने आया।
सुबह 9:44 बजे विद्यालय पहुंचने पर खाली मिली कक्षाएं
जानकारी के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 को शनिवार सुबह लगभग 9:44 बजे शासकीय प्राथमिक शाला मुडापारा पहुंचने पर विद्यालय परिसर में कोई भी बच्चा दिखाई नहीं दिया। कक्षाएं भी खाली नजर आईं। विद्यालय में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं का संचालन एक ही कमरे में होने की जानकारी सामने आई। विद्यालय में कुल 17 बच्चों का नामांकन बताया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विद्यालय में बच्चों की दर्ज संख्या 17 है, तो निर्धारित शाला समय के दौरान एक भी बच्चा विद्यालय क्यों नहीं पहुंचा? क्या बच्चों की अनुपस्थिति के कारणों की जानकारी लेने के लिए शिक्षकों द्वारा अभिभावकों से संपर्क किया जाता है? क्या बच्चों को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित करने के प्रयास किए जा रहे हैं?
बच्चों की अनुपस्थिति पर प्रधान पाठक ने कहा- आज बच्चे स्कूल नहीं आए
विद्यालय पहुंचने पर प्रधान पाठक जगराम मिरी उपस्थित मिले। जब उनसे विद्यालय में बच्चों की अनुपस्थिति के संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि आज बच्चे स्कूल नहीं आए हैं। लेकिन विद्यालय में एक भी बच्चे का उपस्थित नहीं होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सरकारी विद्यालय ही बच्चों की शिक्षा का प्रमुख माध्यम हैं, वहां बच्चों को विद्यालय से जोड़कर रखना और उनकी पढ़ाई नियमित रूप से संचालित करना आवश्यक है।
सहायक शिक्षक के संकुल केंद्र जाने की बात पर सामने आया विरोधाभास
मामले में सहायक शिक्षक घनश्याम प्रसाद भास्कर की उपस्थिति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। जब प्रधान पाठक जगराम मिरी से सहायक शिक्षक के संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने बताया कि घनश्याम प्रसाद भास्कर मध्यान्ह भोजन का कूपन लेने संकुल केंद्र केराकछार गए हुए हैं।
इसके बाद जब संकुल समन्वयक से इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि मध्यान्ह भोजन कूपन लेने के लिए घनश्याम प्रसाद भास्कर उनके पास नहीं पहुंचे हैं। इस तरह प्रधान पाठक द्वारा दी गई जानकारी और संकुल समन्वयक के बयान में विरोधाभास सामने आया।
बताया गया कि सुबह लगभग 10:50 बजे सहायक शिक्षक घनश्याम प्रसाद भास्कर विद्यालय पहुंचे। उल्लेखनीय है कि शनिवार को विद्यालय संचालन का निर्धारित समय सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक बताया गया है। ऐसे में निर्धारित शाला समय के दौरान शिक्षक की अनुपस्थिति और विद्यालय पहुंचने के समय को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस पूरे मामले में संबंधित शिक्षक का पक्ष और संकुल केंद्र जाने की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
किचन में लटका मिला ताला, नाश्ता बनता हुआ भी नहीं आया नजर
विद्यालय निरीक्षण के दौरान एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। बच्चों को नाश्ता एवं मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए किचन में ताला लटका हुआ मिला। मौके पर न तो नाश्ता तैयार होता दिखाई दिया और न ही भोजन व्यवस्था संचालित होती नजर आई।
सरकार द्वारा विद्यालयों में बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नाश्ता एवं मध्यान्ह भोजन जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए प्रोत्साहित करना है। लेकिन विद्यालय के किचन में ताला मिलने से इन योजनाओं के वास्तविक संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब विभाग को यह जांच करनी चाहिए कि विद्यालय में निर्धारित मीनू के अनुसार नाश्ता एवं मध्यान्ह भोजन नियमित रूप से तैयार किया जाता है या नहीं। भोजन वितरण पंजी, खाद्यान्न स्टॉक, नाश्ता एवं भोजन तैयार करने से संबंधित रिकॉर्ड और बच्चों की उपस्थिति पंजी का मिलान भी किया जाना आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
एक ही कमरे में पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सवाल
विद्यालय में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं का संचालन एक ही कमरे में किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक कक्षा के बच्चों का पाठ्यक्रम और सीखने का स्तर अलग-अलग होता है। ऐसे में पांच कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाने से शिक्षण व्यवस्था कितनी प्रभावी हो पा रही है, यह भी जांच का विषय है।
विद्यालय में कुल 17 बच्चों का नामांकन होने के बावजूद यदि पर्याप्त शैक्षणिक व्यवस्था और कक्ष उपलब्ध नहीं हैं, तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। शिक्षा विभाग को विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं, उपलब्ध कक्षों और शिक्षण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए।
ग्रामीणों ने भी लगाए गंभीर आरोप, समय पर स्कूल नहीं पहुंचते शिक्षक
विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में शिक्षक नियमित रूप से निर्धारित समय पर नहीं पहुंचते हैं। इतना ही नहीं, कई बार निर्धारित समय से पहले ही विद्यालय में छुट्टी कर दी जाती है। यदि ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों की नियमित पढ़ाई और उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में गरीब और मजदूर परिवारों के बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे में यदि शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचेंगे और बच्चों को निर्धारित समय तक पढ़ाई का अवसर नहीं मिलेगा, तो इसका सीधा असर उनकी शिक्षा पर पड़ेगा।
इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर विद्यालय के वास्तविक संचालन समय, शिक्षकों की उपस्थिति और बच्चों को पढ़ाए जाने वाले समय की जानकारी जुटाना आवश्यक है।
शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने संकुल केंद्र से लेकर विकासखंड स्तर तक शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करने वाले जिम्मेदार अधिकारी इस स्थिति से अनजान कैसे हैं? क्या संकुल समन्वयक द्वारा विद्यालय का नियमित निरीक्षण किया जाता है? क्या शिक्षकों की उपस्थिति और बच्चों की नियमित उपस्थिति की समीक्षा होती है? क्या नाश्ता एवं मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन की वास्तविक स्थिति की जांच की जाती है?
यदि शिक्षक किसी विभागीय कार्य अथवा संकुल संबंधी कार्य से विद्यालय से बाहर जाते हैं, तो उस दौरान शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो, इसकी जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों की है। वहीं विद्यालय में बच्चों की लगातार अनुपस्थिति होने पर उनके अभिभावकों से संपर्क कर उपस्थिति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए।
बीईओ से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
शासकीय प्राथमिक शाला मुडापारा में सामने आई स्थिति को देखते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी करतला एवं संकुल केंद्र केराकछार के जिम्मेदार अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता है।
जांच के दौरान 31 अक्टूबर 2026 की शिक्षकों की उपस्थिति पंजी, बच्चों की उपस्थिति पंजी, सहायक शिक्षक के संकुल केंद्र जाने संबंधी जानकारी, मध्यान्ह भोजन कूपन वितरण का रिकॉर्ड, नाश्ता एवं भोजन व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।
इसके साथ ही ग्रामीणों द्वारा शिक्षकों के देर से विद्यालय पहुंचने और समय से पहले छुट्टी देने के आरोपों की भी जांच होनी चाहिए। विद्यालय में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के एक ही कमरे में संचालन के कारणों की जानकारी लेकर आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए।
अब देखना होगा, शिक्षा विभाग कब लेता है मामले का संज्ञान
सरकारी विद्यालय ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों के भविष्य की नींव होते हैं। ऐसे में विद्यालयों में नियमित पढ़ाई, शिक्षकों की समय पर उपस्थिति, बच्चों की नियमित सहभागिता और शासन की योजनाओं का सही तरीके से संचालन बेहद जरूरी है।
शासकीय प्राथमिक शाला मुडापारा में निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति और ग्रामीणों की शिकायतों को देखते हुए अब शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ गई है। देखना होगा कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी करतला इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और विद्यालय की वास्तविक स्थिति की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों को उम्मीद है कि विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे, जिम्मेदारों से जवाब मांगेंगे और विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएंगे।

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