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इसराइल चुनाव बहुमत से दूर नेतनयाहू अरब मुस्लिम के पार्टियों के हाथ सत्ता की चाबी…

क्या इजराइल में बढ़ेगा अरब पार्टियों का प्रभाव? नेतन्याहू बहुमत से 8 सीट दूर, सरकार गठन में अहम भूमिका

इजराइल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक समीकरण दिलचस्प हो गए हैं। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के आंकड़े से 8 सीट पीछे है, जबकि विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के गठबंधन को बहुमत के लिए 13 सीटों की कमी है। वहीं, अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें बताई जा रही हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।

इस घटनाक्रम के बीच सवाल उठ रहा है कि इजराइल में अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, सरकार बनाने के लिए किन दलों के बीच गठबंधन हो सकता है और क्या इससे अरब समुदाय का राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा? आइए, समझते हैं सरकार गठन की पूरी प्रक्रिया।

सवाल-1: किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला, अब कैसे बनेगी सरकार?

जवाब: इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। इजराइल में आमतौर पर किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, इसलिए विभिन्न दलों के बीच गठबंधन बनाकर सरकार का गठन किया जाता है।

सरकार गठन की प्रक्रिया में चार प्रमुख चरण होते हैं।

1. राष्ट्रपति तय करेंगे किसे मिलेगा पहला मौका

इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से परामर्श करेंगे। इसके बाद वह उस नेता को सरकार बनाने का अवसर दे सकते हैं, जिसके पास संसद में बहुमत का समर्थन जुटाने की सबसे अधिक संभावना हो।

यह जरूरी नहीं है कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को ही सरकार बनाने का पहला मौका मिले। गठबंधन बनाने की क्षमता भी इसमें महत्वपूर्ण होती है।

2. बहुमत जुटाने के लिए मिलेगा समय

सरकार बनाने का अवसर मिलने के बाद संबंधित नेता को सहयोगी दलों के साथ बातचीत करनी होगी। इसके लिए शुरुआती तौर पर 28 दिन का समय दिया जाता है। राष्ट्रपति इस अवधि को 14 दिन तक बढ़ा सकते हैं।

इस दौरान नेता को ऐसा गठबंधन तैयार करना होता है, जो नेसेट में सरकार के गठन के लिए आवश्यक समर्थन हासिल कर सके।

3. पहला नेता विफल हुआ तो दूसरे को मिल सकता है मौका

यदि पहला नेता निर्धारित समय में सरकार बनाने में सफल नहीं होता, तो प्रक्रिया के तहत किसी दूसरे नेता को अवसर मिल सकता है। आगे भी सरकार गठन की कोशिशें विफल होने पर संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार दूसरे विकल्पों पर विचार किया जाता है।

इजराइल में अल्पमत सरकार का उदाहरण भी सामने आ चुका है। वर्ष 2021 में नफ्ताली बेनेट के नेतृत्व में ऐसी सरकार बनी थी, जिसमें उनकी अपनी पार्टी के पास केवल 7 सीटें थीं। सरकार को अन्य दलों के समर्थन से बहुमत का रास्ता मिला था।

4. सभी प्रयास विफल हुए तो हो सकते हैं नए चुनाव

यदि सरकार बनाने की सभी संभावनाएं समाप्त हो जाती हैं, तो नेसेट को भंग करने और नए चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। ऐसी स्थिति में इजराइल में दोबारा मतदान कराया जा सकता है।

नई सरकार के कार्यभार संभालने तक मौजूदा सरकार अंतरिम व्यवस्था के तहत काम करती रह सकती है।

अरब पार्टियां क्यों हो सकती हैं निर्णायक?

यदि किसी भी गठबंधन के पास अपने दम पर 61 सीटें नहीं हैं, तो उसे अतिरिक्त सांसदों का समर्थन हासिल करना होगा। ऐसे में 19 सीटों वाली अरब पार्टियों का समर्थन सरकार गठन के समीकरण बदल सकता है।

हालांकि, केवल सीटों की संख्या से यह तय नहीं होता कि अरब पार्टियां एक साथ किसी गठबंधन का समर्थन करेंगी या किसी सरकार में शामिल होंगी। इसके लिए उनके राजनीतिक रुख, साझा मुद्दों और अन्य दलों के साथ बातचीत को देखना होगा।

क्या इजराइल में मुस्लिमों का दबदबा बढ़ जाएगा?

अरब पार्टियों की निर्णायक भूमिका से उनका राजनीतिक प्रभाव बढ़ सकता है, लेकिन इसे सीधे तौर पर पूरे देश में मुस्लिमों के दबदबे के रूप में देखना सही नहीं होगा। सरकार बनाने में समर्थन देना, गठबंधन में शामिल होना और सरकार का नेतृत्व करना अलग-अलग स्थितियां हैं।

इसलिए वास्तविक स्थिति का आकलन अंतिम चुनावी नतीजों, गठबंधन की बातचीत और नेसेट में मिलने वाले समर्थन के आधार पर ही किया जा सकता है।

निष्कर्ष: इजराइल में सरकार गठन का रास्ता गठबंधन की राजनीति से होकर गुजरता है। यदि अरब पार्टियों का समर्थन बहुमत जुटाने के लिए जरूरी साबित होता है, तो वे सरकार गठन में अहम भूमिका निभा सकती हैं। लेकिन अगला प्रधानमंत्री कौन होगा और अरब दलों को सत्ता में कितनी भागीदारी मिलेगी, यह अंतिम राजनीतिक समझौतों पर निर्भर करेगा।

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