झालावाड़ से ब्यूरो चीफ आसिफ शेरवानी की रिपोर्ट
5 घंटे चले ऑपरेशन के बाद नीतीश को मिला दर्द से छुटकारा, 10 दिन बाद चैन से सो पाया मासूम
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मां योजना) के तहत पूर्णतः निःशुल्क हुआ ऑपरेशन
झालावाड़, 25 अक्टूबर। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जरी विभाग ने जटिल सर्जरी कर 14 वर्षीय बालक नीतीश कुमार को नया जीवनदान दिया है। कमर में गांठ के कारण नसों के पूरी तरह दब जाने से बालक को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ रहा था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि वह कई दिनों तक सीधे लेटकर सो भी नहीं पा रहा था। न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने करीब पांच घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद गांठ को सफलतापूर्वक निकाल दिया। वर्तमान में बालक स्वस्थ है और उसे दर्द से राहत मिली है। यह ऑपरेशन मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मां योजना) के तहत पूर्णतः निःशुल्क किया गया।
प्रहलादपुरा, रीछवा, बकानी निवासी 14 वर्षीय नीतीश कुमार को अचानक कमर और पैरों में तेज दर्द होने लगा। सीधे लेटने पर दर्द असहनीय हो जाता था। परिजनों ने पहले स्थानीय चिकित्सक से उपचार करवाया, लेकिन दवाइयों से कोई विशेष राहत नहीं मिली। रात के समय जब भी नीतीश बिस्तर पर लेटकर सोने का प्रयास करता, दर्द बढ़ जाता। ऐसे में उसे पूरी रात बैठकर ही गुजारनी पड़ती थी।
इसके बाद परिजन नीतीश को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी के पास लेकर पहुंचे। प्रारंभिक जांच के बाद उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया गया, लेकिन दवाइयों से आराम नहीं मिला। चिकित्सकों ने एमआरआई जांच कराने की सलाह दी। दर्द की गंभीरता के कारण नीतीश का सामान्य स्थिति में लेटकर एमआरआई करवाना भी संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे में चिकित्सकीय निगरानी में बेहोश कर एमआरआई जांच करवाई गई।
जांच में सामने आया कि नीतीश की कमर में मौजूद गांठ ने नसों को पूरी तरह जकड़ रखा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने परिजनों को ऑपरेशन की सलाह दी तथा उच्च स्तरीय उपचार के लिए जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल ले जाने का विकल्प भी बताया। हालांकि, ऑपरेशन की जटिलताओं और संभावित जोखिमों को समझने के बाद भी नीतीश के माता-पिता ने झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में ही उपचार करवाने का निर्णय लिया।
नसों को नुकसान पहुंचने का था गंभीर खतरा
न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी ने बताया कि इस प्रकार की सर्जरी अत्यंत जटिल होती है, क्योंकि गांठ ने नसों को पूरी तरह जकड़ रखा था। गांठ को नसों से अलग करते समय नसों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में मरीज के दोनों पैरों में कमजोरी या लकवा होने तथा पेशाब एवं मल त्याग पर नियंत्रण प्रभावित होने का गंभीर खतरा हो सकता है। इस कारण ऑपरेशन में अत्यधिक सावधानी और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज की टीम ने पूरी सतर्कता और कुशलता के साथ करीब पांच घंटे तक ऑपरेशन किया। सर्जरी सफल रही और वर्तमान में नीतीश की स्थिति स्वस्थ है। कई दिनों से असहनीय दर्द के कारण ठीक से सो नहीं पा रहा नीतीश अब राहत महसूस कर रहा है। यह सफलता झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सकीय टीम के समर्पण को दर्शाती है।
चिकित्सकीय टीम का रहा महत्वपूर्ण योगदान
इस जटिल ऑपरेशन में डॉ. रामसेवक योगी के नेतृत्व में डॉ. रामावतार मालव एवं डॉ. रामलखन मालव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, निश्चेतना विभाग से डॉ. राजीव गुप्ता एवं डॉ. कृति तथा स्टाफ सदस्य कन्हैया लोहार और रवि का भी सहयोग रहा।
मां योजना के अंतर्गत निःशुल्क हुए इस उपचार से आर्थिक रूप से सामान्य परिवार को बड़ी राहत मिली है। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज की इस सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता, समर्पण और टीमवर्क से जटिल चिकित्सा उपचार भी स्थानीय स्तर पर संभव हो सकते हैं।






