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छ.ग. प्रदेश सरपंच महासंघ के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से की मुलाकात, सौंपा 22 सूत्रीय मांग पत्र

अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
छ.ग. प्रदेश सरपंच महासंघ के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से की मुलाकात, सौंपा 22 सूत्रीय मांग पत्र
ग्राम पंचायतों के समग्र विकास, स्वावलंबन और सरपंचों के अधिकारों की रक्षा के लिए ‘छत्तीसगढ़ प्रदेश सरपंच महासंघ’ के एक 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष श्री कपिल देव नायक जी के नेतृत्व में माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से उनके निवास कार्यालय में सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने और पंचायत संचालन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने हेतु मुख्यमंत्री महोदय को 22 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में महासंघ के सभी प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में निम्नलिखित पदाधिकारी शामिल थे:

  • श्री कपिल देव नायक (प्रदेश अध्यक्ष)
  • श्री रघुवीर पिंटू सिन्हा (प्रदेश उपाध्यक्ष)
  • श्रीमती राजेश्वरी कैलाश आदिल (प्रदेश महासचिव)
  • श्री संकेत अग्रवाल (प्रदेश उपाध्यक्ष)
  • श्री हरिशंकर साहू (संरक्षक)
  • श्री लखन पटेल जी (प्रदेश उपाध्यक्ष)
  • श्री टिकेश्वर साहू (प्रदेश उपाध्यक्ष)
  • श्रीमती किरण शत्रुहन चेलक (प्रदेश महासचिव)
  • श्री हिमांशु शेखर साहू (अध्यक्ष, सरपंच संघ धमतरी)
  • श्री तोरण दास मानिकपुरी (मीडिया एवं कार्यालय प्रभारी, छत्तीसगढ़)
  • श्रीमती रेखा लिंगराज साहू
  • श्री कमल
    मुख्यमंत्री को सौंपे गए 22 सूत्रीय मांग पत्र के प्रमुख बिंदु:
    महासंघ के पदाधिकारियों ने पंचायत सशक्तिकरण हेतु निम्नलिखित 22 मांगों को सारगर्भित रूप में प्रस्तुत किया:
  • मानदेय वृद्धि: सरपंचों का मासिक मानदेय ₹4,000 से बढ़ाकर सम्मानजनक ₹15,000 किया जाए।
  • वित्त आयोग: ग्राम पंचायतों के विकास हेतु 16वें वित्त आयोग की राशि तत्काल जारी की जाए।
  • सरपंच की सहमति: पंचायत सचिव व रोजगार सहायकों के स्थानांतरण, अवकाश और C.R. में सरपंच की सहमति/अभिमत अनिवार्य हो।
  • भुगतान सरलीकरण: V B GRAM G योजना के तहत मजदूरी व सामग्री भुगतान में देरी समाप्त कर प्रक्रिया सरल की जाए।
  • सरपंच बीमा: कार्यकाल के दौरान सरपंचों को सुरक्षा प्रदान करते हुए ₹1 करोड़ का दुर्घटना/जीवन बीमा किया जाए।
  • सरपंच निधि: मूलभूत सुविधाओं (पेयजल, लाइट, नाली) के लिए जनसंख्या के अनुपात में ₹2 से ₹5 लाख की सरपंच निधि प्रतिवर्ष मिले।
  • DMF फंड: खनिज न्यास निधि (DMF) का प्रत्यक्ष एवं समान लाभ प्रभावित ग्राम पंचायतों को दिया जाए।
  • फर्जी शिकायतों पर रोक: RTI के दुरुपयोग और सरपंचों के विरुद्ध होने वाली दुर्भावनापूर्ण व फर्जी शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई के नियम बनें।
  • अधिकारों का विकेंद्रीकरण: कार्यों में विलंब रोकने के लिए तकनीकी स्वीकृति व मूल्यांकन का अधिकार जनपद स्तर पर दिया जाए।
  • स्वच्छ भारत मिशन: महंगाई को देखते हुए व्यक्तिगत शौचालय निर्माण की प्रोत्साहन राशि में वृद्धि की जाए।
  • स्टाफ की पूर्ति: विकास कार्यों को सुचारू रखने के लिए पंचायतों में रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती हो।
  • पीएम आवास: ग्रामीण आवास की राशि शहरी क्षेत्र के समान ₹2.50 लाख की जाए और छूटे हुए पात्र हितग्राहियों के लिए ‘आवास प्लस’ का पुनः सर्वे हो।
  • GeM पोर्टल से मुक्ति: तकनीकी जटिलताओं और बाजार से अधिक मूल्य होने के कारण पंचायतों के लिए जेम (GeM) पोर्टल की अनिवार्यता पूर्णतः समाप्त हो।
  • SNA पोर्टल: SNA समग्र पोर्टल में मजदूरी व निर्माण भुगतान के नियमों का शिथिलीकरण किया जाए।
  • नई SOR दर: वर्तमान महंगाई दर के अनुसार निर्माण कार्यों के लिए 2021 की पुरानी SOR दर को बदलकर नई दर लागू की जाए।
  • युक्तधारा पोर्टल: ग्रामसभा की कार्ययोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन हेतु पंचायतों को युक्तधारा पोर्टल में सीधे ‘USER’ के रूप में जोड़ा जाए।
  • मनरेगा लंबित भुगतान: बंद हो चुकी मनरेगा योजना के सामग्री मद में लंबित करोड़ों रुपयों का तत्काल भुगतान हो।
  • निर्माण कार्य स्पष्टता: 50 लाख रुपये तक के सभी प्रकार के निर्माण कार्यों में ग्राम पंचायत को ही निर्माण एजेंसी बनाने के स्पष्ट निर्देश जारी हों।
  • भवन निर्माण नियम: जर्जर पंचायत भवनों की स्थिति देखते हुए नए भवन निर्माण के लिए ’30 वर्ष पुराने होने’ की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
  • भुगतान की समय-सीमा: पंचायतों द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों की द्वितीय एवं अंतिम किश्त का भुगतान तय समय-सीमा में सुनिश्चित हो।
  • पेंशन नियमों में छूट: विकलांग पेंशन के पुराने (2012) सर्वे नियमों को शिथिल कर 80% से अधिक विकलांगता वाले सभी व्यक्तियों को तत्काल लाभ मिले।
  • नेटवर्क समस्या एवं स्वतंत्रता: सुदूर क्षेत्रों में नेटवर्क सुधरने तक ‘चेक बुक’ से राशि आहरण की छूट मिले, तथा GPDP के अंतर्गत आने वाले सभी 318 कार्यों को चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता सरपंचों को दी जाए।
    प्रदेश अध्यक्ष श्री कपिल देव नायक ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने सभी पदाधिकारियों की बातों और 22 बिंदुओं को बहुत ही गंभीरता व संवेदनशीलता के साथ सुना है। महासंघ को पूर्ण विश्वास है कि सरकार जल्द ही इन मांगों पर मुहर लगाकर पंचायत प्रतिनिधियों को राहत प्रदान करेगी।
    भवदीय / जारीकर्ता:
    तोरण दास मानिकपुरी
    (मीडिया एवं कार्यालय प्रभारी, छत्तीसगढ़)
    छ.ग. प्रदेश सरपंच महासंघ

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