नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी एबी डिविलियर्स की दोस्ती क्रिकेट जगत में काफी चर्चित रही है। आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की ओर से खेलते हुए दोनों ने कई यादगार पारियां खेलीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मजबूत दोस्ती की शुरुआत विराट कोहली को लेकर अच्छी धारणा के साथ नहीं हुई थी?
एबी डिविलियर्स ने हाल ही में प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान विराट कोहली के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने स्वीकार किया कि जब वह पहली बार विराट से मिले थे, तब भारतीय बल्लेबाज का अंदाज उन्हें कुछ ज्यादा ही आत्मविश्वास से भरा हुआ लगा था। उनकी पहली धारणा थी कि विराट थोड़े घमंडी और अकड़ू स्वभाव के हैं।
पहली मुलाकात में विराट को लेकर बनी थी अलग राय
डिविलियर्स से जब पूछा गया कि क्या पहली मुलाकात में उन्हें विराट कोहली घमंडी और जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वासी लगे थे, तो उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि विराट भी शायद अपने शुरुआती दिनों के बारे में इस आकलन से सहमत होंगे।
हालांकि, डिविलियर्स की बात का मतलब विराट के खेल या उनकी प्रतिभा पर सवाल उठाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय विराट युवा थे और उनके भीतर खुद को साबित करने की जबरदस्त इच्छा थी। उनका आत्मविश्वास कभी-कभी दूसरों को घमंड जैसा दिखाई दे सकता था।
विराट के आत्मविश्वास को बाद में समझ पाए डिविलियर्स
एबी डिविलियर्स के मुताबिक, विराट कोहली को करीब से जानने और मैदान पर उनका खेल देखने के बाद उनकी सोच बदलने लगी। उन्हें समझ आया कि विराट के व्यक्तित्व के पीछे मजबूत आत्मविश्वास, प्रतिस्पर्धा की भावना और अपने प्रदर्शन से खुद को साबित करने की ललक थी।
डिविलियर्स ने यह भी माना कि विराट के आत्मविश्वास को शुरुआती दौर में गलत तरीके से समझा गया था। उनके अनुसार, बड़ी सफलता हासिल करने के लिए अपने कौशल और क्षमताओं पर भरोसा होना बेहद जरूरी है।
समय के साथ और मजबूत हुई दोनों की दोस्ती
विराट कोहली और एबी डिविलियर्स ने आईपीएल में लंबे समय तक एक साथ खेला। इस दौरान दोनों के बीच मैदान पर शानदार तालमेल बना और मैदान के बाहर भी उनकी दोस्ती मजबूत होती गई।
डिविलियर्स के इस खुलासे से यह साफ होता है कि किसी खिलाड़ी की पहली छवि और उसके वास्तविक व्यक्तित्व को समझने में अंतर हो सकता है। जिस आत्मविश्वास को उन्होंने शुरुआती मुलाकात में अकड़ समझा था, समय के साथ उसी के पीछे छिपी विराट की मेहनत, महत्वाकांक्षा और क्रिकेट के प्रति जुनून को उन्होंने बेहतर ढंग से पहचाना।
कुल मिलाकर, एबी डिविलियर्स का यह बयान विराट कोहली के शुरुआती करियर के उस दौर की झलक देता है, जब वह अपनी पहचान बनाने और दुनिया के सामने अपनी क्षमता साबित करने में जुटे थे।






