लोकेशन – समस्तीपुर
रिपोर्ट – नवनीत कुमार झा
दस्तावेजीकरण, क्लीयरेंस और विभागीय समन्वय की चुनौतियों पर चर्चा, डीडीसी सूर्य प्रताप सिंह ने कारोबार विस्तार और रोजगार सृजन के लिए किया प्रोत्साहित
समस्तीपुर । स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने, कारोबार का विस्तार करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में सोमवार को जिला उद्योग केंद्र, समस्तीपुर के सभाकक्ष में एक दिवसीय ‘एक्सपोर्ट अवेयरनेस वर्कशॉप फॉर एमएसएमई’ का आयोजन किया गया। ‘इन्वेस्ट बिहार—अ लैंड ऑफ इमेंस अपॉर्च्युनिटीज’ थीम पर आयोजित इस कार्यशाला में उद्यमियों को निर्यात की प्रक्रिया, उपलब्ध सुविधाओं और वैश्विक बाजार की संभावनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही, निर्यात के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और उनके समाधान पर भी चर्चा हुई।
कार्यशाला का उद्घाटन उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह एवं जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक विवेक कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। मौके पर भारत सरकार के इंडिया पोस्ट से आशुतोष नंदन, मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव राकेश कुमार, पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक सुबोध कुमार तथा एमएसएमई निर्यात सलाहकार ऋषु राज मौजूद रहे।
स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर
स्वागत भाषण में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक विवेक कुमार शर्मा ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्थानीय उद्यमियों को निर्यात प्रक्रिया, उपलब्ध सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग की जानकारी देना आवश्यक है। इससे उद्यमी अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने और कारोबार का विस्तार करने की दिशा में बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
वहीं, उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह ने उद्यमियों को निर्यात के अवसरों की पहचान करने, बाजार की जरूरतों को समझने और अपने व्यवसाय को नई दिशा देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने निर्यात को केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित न मानते हुए इसे कारोबार विस्तार, निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण संभावना के रूप में देखने पर जोर दिया। उन्होंने स्थानीय उत्पादों और उद्यमशीलता को उचित मार्गदर्शन एवं संस्थागत सहयोग के जरिए बड़े बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
दस्तावेजीकरण और क्लीयरेंस की समस्याएं बनीं चर्चा का केंद्र
कार्यशाला के दौरान उद्यमियों ने निर्यात से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों को प्रमुखता से उठाया। दस्तावेजीकरण की जटिलताओं, क्लीयरेंस में आने वाली परेशानियों, विभागीय समन्वय की कमी और अपेक्षित सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
उद्यमियों की समस्याओं से यह बात सामने आई कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रक्रियाओं को सरल बनाना, समय पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना भी जरूरी है। इससे उद्यमियों को निर्यात संबंधी औपचारिकताओं को समझने और अपने उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
बैंकिंग और डाक सेवाओं की सुविधाओं की दी गई जानकारी
तकनीकी सत्र में एमएसएमई निर्यात सलाहकार ऋषु राज ने निर्यात से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। इंडिया पोस्ट के आशुतोष नंदन और राकेश कुमार ने डाक सेवाओं तथा निर्यात से संबंधित उपलब्ध सुविधाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक सुबोध कुमार की मौजूदगी में बैंकिंग और वित्तीय सहयोग से जुड़े विषयों पर संवाद हुआ।
कार्यशाला का उद्देश्य उद्यमियों को निर्यात की प्रक्रिया समझाने के साथ उन्हें उपलब्ध संस्थागत सुविधाओं से परिचित कराना रहा, ताकि वे अपने कारोबार को व्यापक स्तर पर विकसित करने की संभावनाओं पर काम कर सकें।
कारोबार के साथ रोजगार बढ़ाने की संभावनाएं
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि समस्तीपुर के उद्यमियों को सही जानकारी, सरल प्रक्रियाएं और प्रभावी संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाए, तो स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। इससे कारोबार के विस्तार के साथ रोजगार सृजन के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
मौके पर बियाडा के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक कुमार तथा जिला उद्योग केंद्र के राहुल, बिपिन चंद्र, मुकेश कुमार एवं पूर्णवासी उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन शिक्षक सुभीत कुमार सिंह ने किया।





