रजत मल्होत्रा
2 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में एक विशेष और गौरवमयी स्थान रखता है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि दो ऐसी महान विभूतियों की जयंती का दिन है जिन्होंने अपने महान विचारों और अद्भुत चरित्र से भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व को आलोकित किया – राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री।
सत्य और अहिंसा के मार्गदर्शक: महात्मा गांधी
वर्ष 1869 में पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने विश्व को सिखाया कि अहिंसा केवल युद्ध न करने का नाम नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की सबसे शक्तिशाली मानवीय प्रेरणा है। उन्होंने सत्य और अहिंसा को हथियार बनाकर शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।
गांधी जी का मानना था कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है। उनके द्वारा दिए गए स्वच्छता, ग्राम स्वराज, खादी और स्वावलंबन के सिद्धांत आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। जब पूरा विश्व शांति और भाईचारे की राह तलाश रहा है, तब गांधी जी का विचार ही प्रकाशपुंज बनकर मार्ग दिखाता है।
साहस और सादगी की प्रतिमूर्ति: लाल बहादुर शास्त्री
गांधी जी की ही जयंती के दिन, वर्ष 1904 में जन्मे देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन त्याग, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प का उदाहरण है। ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ के सिद्धांत को जीने वाले शास्त्री जी ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश का मनोबल टूटने नहीं दिया।
1965 के युद्ध के समय उन्होंने देश को “जय जवान, जय किसान” का अमर नारा दिया, जिसने देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों और अन्नदाताओं को एक नई ऊर्जा व सम्मान दिया। अपनी सादगी और निस्वार्थ सेवा से उन्होंने हर देशवासी के हृदय में अमिट छाप छोड़ी।
हमारे लिए प्रेरणा और संकल्प
महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी, दोनों का जीवन हमें सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा, सत्य और नैतिकता से बड़ा कोई मार्ग नहीं है। आज जब हम इस पावन अवसर को मना रहे हैं, तो हमारा सच्चा नमन यही होगा कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलें, स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाएं और देश की प्रगति में अपना योगदान दें।
“सत्य, अहिंसा और स्वाभिमान का यह मार्ग, सदैव भारत को प्रगति के शिखर पर रखे।”






