रिपोर्ट—रजत मल्होत्रा
मुरादाबाद। यूपी के मुरादाबाद जिले के छोटे से गांव कुंदरकी की बेटी इल्मा अफरोज ने अपनी मेहनत और हौसले से एक मिसाल कायम की है। यूपीएससी 2017 की परीक्षा में 217वीं रैंक हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।
इल्मा जब महज 14 साल की थीं, तब उनके किसान पिता का निधन हो गया था। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई। रिश्तेदारों ने उनकी शादी का दबाव बनाया, लेकिन उनकी मां और भाई उनके साथ खड़े रहे। उनके भाई ने दहेज के लिए पैसे जोड़ने की बजाय अपनी बहन की पढ़ाई पर हर पैसा खर्च करने का फैसला लिया।
इल्मा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और अपनी काबिलियत के दम पर स्कॉलरशिप हासिल कर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तक का सफर तय किया। विदेश में पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने पार्ट-टाइम नौकरियां कीं, जिसमें इंग्लैंड में बर्तन धोने तक का काम शामिल था। इसके बाद उन्होंने फ्रांस और अमेरिका में भी काम किया।
अच्छी नौकरी और बेहतर जिंदगी छोड़कर देश सेवा की चाह उन्हें वापस भारत खींच लाई। भारत लौटकर उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की।
आज इल्मा अफरोज हिमाचल प्रदेश कैडर की 2018 बैच की IPS अधिकारी हैं और युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
- प्रारंभिक जीवन और संघर्ष:
इल्मा अफरोज का जन्म मुरादाबाद के कुंदरकी कस्बे में एक छोटे किसान परिवार में हुआ। जब वह 14 साल की थीं तब कैंसर से उनके पिता का निधन हो गया था। पिता के जाने के बाद उनकी मां ने अकेले ही इल्मा और उनके 12 साल के छोटे भाई की परवरिश की। उनकी मां ने दहेज के लिए पैसे जोड़ने की बजाय बेटी की शिक्षा पर पैसा लगाने का फैसला लिया। - शिक्षा – गांव से ऑक्सफोर्ड तक:
शुरुआती पढ़ाई कुंदरकी में ही की, फिर दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से फिलॉसफी में ग्रेजुएशन किया। वहाँ से उन्हें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वुल्फसन कॉलेज में स्कॉलरशिप मिली। ऑक्सफोर्ड के बाद वह एक्सचेंज स्टूडेंट के तौर पर पेरिस के Sciences Po में भी पढ़ीं और अमेरिका के मैनहट्टन में वॉलंटरी सर्विस प्रोग्राम में हिस्सा लिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (इंडोनेशिया) में भी काम किया है। - विदेश में संघर्ष:
पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने इंग्लैंड में बर्तन धोने तक के पार्ट-टाइम काम किए। परिवार ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण वह कई बार घर भी नहीं आ पाती थीं। - UPSC और IPS करियर:
2017 में पहले ही प्रयास में UPSC में 217वीं रैंक हासिल की और 2018 बैच में IPS बनीं, कैडर हिमाचल प्रदेश मिला। प्रोबेशन के दौरान मंडी और ऊना में SDPO रहीं, फिर स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स में SP बनीं। बद्दी जिले में उनकी पहली पोस्टिंग SP के रूप में रही। - चर्चित कार्य:
बद्दी में SP रहते हुए उन्होंने अपने ऑफिस में गरीब बच्चों के लिए शाम को स्कूल शुरू किया, जो 20 बच्चों से शुरू होकर 450 से ज्यादा बच्चों तक पहुंच गया।






