सब्जी विक्रेताओं ने मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधियों से लगाई गुहार, नगर निगम कर्मचारियों से निर्धारित शुल्क वसूलने की मांग
बरेली। शहर की एलन क्लब सब्जी मंडी, कुतुबखाना और श्यामगंज सब्जी मंडी की ठेका व्यवस्था को लेकर सब्जी विक्रेताओं ने विरोध जताया है। विक्रेताओं ने 18 अगस्त 2026 को हुई सब्जी मंडियों की नीलामी निरस्त करने और ठेके के बजाय नगर निगम द्वारा निर्धारित तहबाजारी यानी उपयोग शुल्क निगम कर्मचारियों के माध्यम से वसूलने की मांग की है। इस संबंध में मुख्यमंत्री और जिले के जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की अपील की गई है।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि ठेके की रकम लगातार बढ़ने का सीधा असर मंडी में दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों और किसानों पर पड़ सकता है। उनका दावा है कि ठेकेदार द्वारा अपनी लागत निकालने के लिए प्रतिदिन की वसूली बढ़ाई जा सकती है, जिससे सीमित आमदनी में कारोबार करने वाले विक्रेताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
1.40 करोड़ से बनी एलन क्लब सब्जी मंडी
दिए गए पत्र के मुताबिक स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत एलन क्लब सब्जी मंडी का निर्माण करीब 1.40 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। पत्र में अलग-अलग वर्षों में मंडी के ठेके की रकम का भी उल्लेख किया गया है।
विक्रेताओं के अनुसार वर्ष 2019-20 में ठेका करीब 18 लाख रुपये, 2020-21 में 36 लाख रुपये, 2021-22 में 57.50 लाख रुपये और 2022-23 में करीब 80 लाख रुपये तक पहुंच गया। वर्ष 2024-25 में भी ठेका करीब 80 लाख रुपये का होने का दावा किया गया है। पत्र में ठेके की राशि पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से होने की बात कही गई है।
30 रुपये से शुरू हुई वसूली, अब 200 रुपये प्रतिदिन का जताया अंदेशा
सब्जी विक्रेताओं का दावा है कि वर्ष 2019-20 में प्रतिदिन करीब 30 रुपये की वसूली से व्यवस्था शुरू हुई थी। अब ठेके की रकम बढ़ने के कारण विक्रेताओं को आशंका है कि यह वसूली करीब 200 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकती है।
विक्रेताओं का कहना है कि मंडियों में बड़ी संख्या में छोटे किसान और फुटकर सब्जी विक्रेता कारोबार करते हैं। ऐसे लोगों की आमदनी पहले ही सीमित होती है। यदि प्रतिदिन भुगतान की जाने वाली राशि में बड़ी बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ेगा।
18 अगस्त की नीलामी निरस्त करने की मांग
पत्र में 18 अगस्त 2026 को हुई सब्जी मंडियों की नीलामी को निरस्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। एलन क्लब सब्जी मंडी को लेकर दावा किया गया है कि नीलामी में करीब 98 लाख 50 हजार रुपये की बोली लगी है। जीएसटी और स्टाम्प शुल्क जोड़ने के बाद कुल राशि एक करोड़ रुपये से अधिक होने की बात कही गई है।
विक्रेताओं का तर्क है कि इतनी बड़ी ठेका राशि की भरपाई अंततः मंडी में कारोबार करने वाले दुकानदारों से वसूली के जरिए किए जाने की आशंका है। हालांकि कितनी राशि वसूली जाएगी, इसे लेकर पत्र में जताई गई बात विक्रेताओं की आशंका है।
कथित अवैध वसूली और सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
सब्जी विक्रेताओं ने अपने पत्र में मंडियों की पुरानी व्यवस्था से जुड़े कई अन्य आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले रात सात बजे के बाद मंडी में असामाजिक तत्वों के जमावड़े और दुकानदारों की सब्जियां चोरी होने की शिकायतें सामने आती थीं। इसके साथ ही विक्रेताओं से कथित अवैध वसूली किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
विक्रेताओं के मुताबिक वर्तमान में नगर निगम कर्मचारियों द्वारा तहबाजारी यानी उपयोग शुल्क वसूला जा रहा है। उनका दावा है कि इस व्यवस्था में उन्हें पहले की अपेक्षा राहत मिली है। इसी कारण वे नगर निगम के कर्मचारियों के माध्यम से ही निर्धारित शुल्क की वसूली जारी रखने की मांग कर रहे हैं।
नगर निगम से निर्धारित शुल्क ही लेने की मांग
विक्रेताओं ने मांग की है कि एलन क्लब, कुतुबखाना और श्यामगंज सब्जी मंडी में ठेका व्यवस्था लागू करने के बजाय नगर निगम स्वयं शुल्क वसूले। शुल्क भी वही हो जो निगम द्वारा आधिकारिक रूप से निर्धारित किया गया हो।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि अधिक वसूली की स्थिति में ठेकेदार और दुकानदारों के बीच विवाद पैदा हो सकता है। इसलिए मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधियों और नगर निगम प्रशासन से मांग की गई है कि मामले का समय रहते संज्ञान लेकर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे निगम को निर्धारित राजस्व मिलता रहे और छोटे किसानों व सब्जी विक्रेताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।






