बिहार के भागलपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने देश की चुनावी राजनीति के एक अनोखे किरदार को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। नागरमल बाजोरिया, जिन्हें लोग प्यार से ‘धरतीपकड़’ के नाम से जानते थे, अब इस दुनिया में नहीं रहे।
धरतीपकड़ की पहचान किसी बड़ी चुनावी जीत से नहीं, बल्कि चुनाव लड़ने के उनके अनोखे जुनून से बनी थी। पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा और देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति तक, उन्होंने लगातार चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने 280 से अधिक बार चुनावी मैदान में उतरकर एक अलग पहचान बनाई। हालांकि चुनावी सफर में उन्हें कभी जीत हासिल नहीं हुई, लेकिन हार ने उनके हौसले को कभी कम नहीं किया। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों में भी उन्होंने कई बार अपनी दावेदारी पेश कर सुर्खियां बटोरीं।
97 वर्षीय नागरमल बाजोरिया का पटना में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही भारतीय लोकतंत्र की उस अनोखी कहानी का अंत हो गया, जिसमें एक व्यक्ति ने जीत से ज्यादा चुनावी प्रक्रिया में अपनी भागीदारी को महत्व दिया।
252 बार चुनाव लड़ चुके धरतीपकड़ का हुआ निधन पटना में ली अंतिम सांस राष्ट्रपति चुनाव से….






