रिपोर्ट अखिलेश गौतम
सीतापुर। विकासखंड पिसावां में भ्रष्टाचार अब आरोप नहीं, सरकारी दस्तावेजों में साबित हो चुका है। खंड विकास अधिकारी पिसावां द्वारा जारी दो अलग-अलग पत्रों ने 11 लाख से अधिक के गबन का खुलासा किया है।
पहला मामला – ठकुरेपुर पंचायत में एक काम पर दो बार भुगतान – 9.37 लाख का गबन
पत्रांक 1589/2026-27, दिनांक 01 जुलाई 2026
जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ग्राम रमुवापुर में इंटरलॉकिंग कार्य के नाम पर 20-08-2025 को लगभग 4,97,590 रुपये का भुगतान किया गया। फिर उसी कार्य का नाम बदलकर 29-04-2026 को दोबारा लगभग 4,40,228 रुपये निकाल लिए गए।
मौके पर पहला कार्य मौजूद ही नहीं मिला। BDO ने अपने पत्र में इसे स्पष्ट रूप से “शासकीय धनराशि के दुरुपयोग / गबन” की श्रेणी में माना है और पूरी धनराशि 9,37,818 रुपये को वसूल योग्य बताया है।
दूसरा मामला – देवकली-बेनियापुर में काम से 3 महीने पहले ही पैसा हजम – 1.95 लाख का गबन
पत्रांक 1856/2026-27, दिनांक 08 जुलाई 2026 – अंतिम चेतावनी
यहां धीरज के मकान से शिवालय तक CC रोड व नाली निर्माण कार्य जनवरी 2026 में कराया गया, लेकिन इसका भुगतान 28-10-2025 को ही 1,95,439 रुपये ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से निकाल लिया गया।
जांच में कार्य मानक विहीन
और बिना प्राक्कलन व बिना तकनीकी स्वीकृति के पाया गया। BDO ने अंतिम चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि जवाब नहीं मिला तो वेतन से वसूली और वित्तीय गबन में FIR दर्ज कराई जाएगी।
कुल मिलाकर लगभग 11,33,257 रुपये के गबन की पुष्टि सरकारी पत्रों में हो चुकी है।
बड़ा सवाल – जब BDO कार्यालय खुद गबन की पुष्टि कर चुका है, पत्र उच्चाधिकारियों को भेजा जा चुका है, तो अब तक वसूली और FIR क्यों नहीं हुई? क्या पिसावां ब्लॉक में कार्रवाई सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगी?
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सीतापुर से पूरे विकासखंड के कार्यों का भौतिक सत्यापन और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की है।






