कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की चेतावनी, अनुमति और भीड़ प्रबंधन की जांच की भी मांग
बरेली। बरेली क्लब मेला ग्राउंड में 27 अगस्त को आयोजित रक्षाबंधन समारोह के दौरान भगदड़ और मौतों की घटना को लेकर अब जिम्मेदारी तय करने और कानूनी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। जनसत्ता दल के जिला महामंत्री सोनू ठाकुर ने बरेली के मेयर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में कार्यक्रम की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और पुलिस बल की तैनाती समेत पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की गई है।
20 हजार से अधिक महिलाओं के पहुंचने का दावा
बताया जा रहा है कि रक्षाबंधन के अवसर पर बरेली क्लब मेला ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में 20 हजार से अधिक महिलाएं पहुंची थीं। आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के बावजूद भीड़ को नियंत्रित करने और आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं थीं।
कार्यक्रम के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने के बाद आयोजन की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठे। घटना में दो बच्चों समेत एक महिला की मौत होने की बात सामने आई है। मौतों की संख्या और परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
मेयर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग
जनसत्ता दल के जिला महामंत्री सोनू ठाकुर ने सिटी मजिस्ट्रेट को दिए ज्ञापन में मांग की है कि पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी तय की जाए और यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो मेयर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी मांग उठाई कि यह स्पष्ट किया जाए कि इतने बड़े आयोजन के लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुमति ली गई थी या नहीं और आयोजन से पहले संबंधित विभागों को कितनी जानकारी दी गई थी।
“कार्रवाई नहीं हुई तो योगी जी से मिलेंगे”
सोनू ठाकुर ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर मामले में कार्रवाई नहीं की जाती या इसे दबाने का प्रयास किया जाता है तो वे इस मुद्दे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठाएंगे और कार्रवाई की मांग करेंगे।
उनका कहना है कि हादसे में जान जाने से जुड़े मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल आयोजन में भीड़ प्रबंधन को लेकर है। यदि कार्यक्रम में हजारों लोगों के आने का अनुमान पहले से था तो प्रवेश और निकास, बैरिकेडिंग, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती, मेडिकल सहायता और आपातकालीन व्यवस्था किस स्तर पर की गई थी, इसकी जांच की मांग की जा रही है।
इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया गया है कि कार्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमति और पुलिस-प्रशासन को पूर्व सूचना देने की प्रक्रिया पूरी की गई थी या नहीं।
फिलहाल जनसत्ता दल की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन ज्ञापन में लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में आयोजन की जिम्मेदारी को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।






