लोकेशन – समस्तीपुर
रिपोर्ट – नवनीत कुमार झा
छह दिनों की भूख हड़ताल, सड़क से उठी आवाज अब NHAI के दरवाजे तक पहुंची
पटना–पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित अलाइनमेंट को लेकर सरायरंजन में शुरू हुआ KSR कॉलेज बचाओ आंदोलन अब अगले चरण में पहुंच गया है। करीब छह दिनों तक चले अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और लगातार उठ रही स्थानीय लोगों की आपत्तियों के बीच पूर्णिया के सांसद एवं कांग्रेस नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों को आवेदन सौंपकर प्रस्तावित मार्ग पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि प्रस्तावित अलाइनमेंट की जद में सरायरंजन का करीब 65 वर्ष पुराना केदार संत रामाश्रय (KSR) महाविद्यालय और उसके आसपास रहने वाले बड़ी संख्या में परिवारों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि मौजूदा अलाइनमेंट से कॉलेज के साथ-साथ विद्यार्थियों, दुकानदारों और स्थानीय ग्रामीणों के सामने भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
छह दिन के आंदोलन के बाद पहुंचे थे पप्पू यादव
KSR कॉलेज को बचाने की मांग को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के छठे दिन, 25 अगस्त को पप्पू यादव स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष कॉलेज एवं प्रभावित परिवारों की समस्याओं को मजबूती से रखा।
प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत और सकारात्मक पहल का भरोसा मिलने के बाद पप्पू यादव ने आंदोलनकारियों का अनशन समाप्त कराया था। उसी दौरान उन्होंने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि वह इस मामले को स्वयं NHAI के समक्ष उठाएंगे और कॉलेज तथा स्थानीय लोगों को बचाने के लिए वैकल्पिक अलाइनमेंट की मांग करेंगे।
अब उनके द्वारा NHAI को आवेदन सौंपे जाने के बाद आंदोलनकारियों की मांग को औपचारिक रूप से संबंधित प्राधिकरण के सामने भी रख दिया गया है।
‘विकास के विरोधी नहीं, लेकिन विकास की कीमत किसी का भविष्य नहीं’
NHAI को दिए गए आवेदन में पप्पू यादव ने वर्तमान प्रस्तावित अलाइनमेंट की तकनीकी एवं व्यवहारिक समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा वैकल्पिक मार्ग तलाशा जाना चाहिए, जिससे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण भी प्रभावित न हो और वर्षों पुराने शिक्षण संस्थान तथा स्थानीय आबादी को अनावश्यक नुकसान से बचाया जा सके।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी विकास परियोजना के खिलाफ नहीं है। उनका सवाल सिर्फ इतना है कि अगर तकनीकी विकल्प मौजूद हैं, तो ऐसा रास्ता क्यों नहीं चुना जाए जिससे एक महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान और सैकड़ों परिवार सुरक्षित रह सकें।
राजन कुमार वर्मा बोले—यह सिर्फ भवन नहीं, हजारों विद्यार्थियों के भविष्य की लड़ाई
NSUI समस्तीपुर के जिला अध्यक्ष राजन कुमार वर्मा ने कहा कि KSR कॉलेज बचाओ आंदोलन केवल एक भवन को बचाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और स्थानीय परिवारों के हितों की लड़ाई है।
उन्होंने कहा कि छह दिनों तक आंदोलनकारियों ने जिस मुद्दे को लेकर संघर्ष किया, उसे पप्पू यादव ने गंभीरता से समझा और धरना स्थल पर पहुंचकर प्रशासन के सामने मजबूती से रखा। उन्होंने यह भी कहा कि पप्पू यादव ने दो दिनों के भीतर NHAI के अधिकारियों से मिलकर आवेदन देने का आश्वासन दिया था और अब उन्होंने अपना वादा पूरा किया है।
राजन कुमार वर्मा ने NHAI से मांग की कि स्थानीय लोगों की आपत्तियों और सांसद द्वारा दिए गए आवेदन को गंभीरता से लेते हुए वर्तमान अलाइनमेंट की निष्पक्ष समीक्षा की जाए तथा KSR महाविद्यालय को सुरक्षित रखते हुए वैकल्पिक मार्ग पर तकनीकी स्तर पर विचार किया जाए।
आंदोलन के बाद अब फैसले की उम्मीद
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष अभिनव अंशु ने कहा कि छह दिनों तक चला अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आंदोलन क्षेत्र की जनता की चिंता और पीड़ा को सामने लाने में सफल रहा है। अब सांसद पप्पू यादव द्वारा NHAI के समक्ष आवेदन दिए जाने के बाद क्षेत्रवासियों की निगाहें प्राधिकरण और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
KSR कॉलेज और प्रभावित परिवारों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब धरना स्थल से निकलकर NHAI के कार्यालय तक पहुंच चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विकास की इस बड़ी परियोजना के बीच कोई ऐसा वैकल्पिक रास्ता निकलेगा, जिसमें एक्सप्रेसवे भी बने और करीब 65 वर्षों से शिक्षा की रोशनी फैला रहा KSR कॉलेज भी सुरक्षित रह सके?









