समिति ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष भगवान सिंह गुर्जर के नेतृत्व में जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचकर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
समिति का आरोप है कि मेरठ में किसान नेताओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था, नागरिक अधिकारों और कानून के शासन की भावना के विपरीत है। पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से मारपीट या उत्पीड़न का मामला सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदारी तय हो।
राष्ट्रीय गुर्जर स्वाभिमान संघर्ष समिति के प्रदेश पदाधिकारी अवनीश सिंह गुर्जर ने कहा कि किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव से जुड़ा पूरा प्रकरण गंभीर है। उन्होंने मांग की कि जांच ऐसे अधिकारियों से कराई जाए जिनका घटना या संबंधित स्थानीय पुलिस इकाई से कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो। इससे जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भरोसा बना रहेगा।
समिति ने अपने ज्ञापन में घटना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। इसमें संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों को संरक्षित करने की बात कही गई है। समिति का कहना है कि किसी भी जांच की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि उससे जुड़े साक्ष्य सुरक्षित रहें और किसी भी स्तर पर उनके साथ छेड़छाड़ की आशंका न हो।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि पीड़ित किसान नेताओं को आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराई जाए, ताकि जांच के दौरान उन पर किसी तरह का दबाव न बनाया जा सके। समिति ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानून के तहत भी कार्रवाई होनी चाहिए।
पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि जांच किसी राजनीतिक, प्रशासनिक या अन्य प्रकार के दबाव से मुक्त होनी चाहिए। साथ ही जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, जिससे आम जनता को यह जानकारी मिल सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई थी और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
जिलाध्यक्ष भगवान सिंह गुर्जर ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी नागरिक के साथ अन्याय या उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसान और किसान नेता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
समिति ने राज्यपाल से पूरे मामले का संज्ञान लेने, संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के निर्देश देने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों ने कहा कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन आगे की रणनीति तय करेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
फिलहाल समिति ने प्रशासन और शासन से इस प्रकरण में पारदर्शी जांच, पीड़ितों को न्याय तथा जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।






