अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
सांसद मद से बने छतदार मंच पर शराबखोरी के आरोप, सुबह बच्चों से पहले मिलती हैं खाली बोतलें और गंदगी; सूचना पटल में तोड़फोड़ से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सरगबुंदिया//बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव रखने वाले स्कूल परिसर में यदि सुबह-सुबह शराब की खाली बोतलें, पानी के पाउच, डिस्पोजल और अन्य कचरा दिखाई दे, तो यह केवल गंदगी का मामला नहीं, बल्कि स्कूल की सुरक्षा और शैक्षणिक वातावरण पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सरगबुंदिया हाईस्कूल के खेल मैदान और परिसर को लेकर ऐसी ही शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि शाम ढलने के बाद कुछ असामाजिक तत्व स्कूल परिसर में प्रवेश कर शराब का सेवन करते हैं और देर रात तक वहां बैठकर परिसर को गंदा करने के साथ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं।
बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर में सांसद मद से विद्यार्थियों एवं अन्य आयोजनों के लिए छतदार मंच का निर्माण कराया गया है। स्थानीय लोगों और स्कूल से जुड़े लोगों का आरोप है कि शाम के समय यही स्थान कुछ लोगों के लिए बैठने और शराबखोरी का अड्डा बन जाता है। शराब सेवन के बाद खाली बोतलें, पानी के पाउच, डिस्पोजल और अन्य कचरा परिसर में ही छोड़ दिया जाता है।
सुबह बच्चों से पहले सामने आती है रात की तस्वीर
स्कूल खुलने से पहले जब शिक्षक और कर्मचारी परिसर में पहुंचते हैं, तो उन्हें कई बार सफाई की समस्या का सामना करना पड़ता है। आरोप है कि परिसर के अलग-अलग हिस्सों में शराब की खाली बोतलें और अन्य सामग्री पड़ी मिलती है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को विद्यार्थियों के पहुंचने से पहले परिसर की सफाई करानी पड़ती है।
सबसे चिंता की बात यह है कि जिस स्थान पर दिन के समय बच्चे खेलते हैं और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, वहां रात के समय कथित रूप से असामाजिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायत है।
सांसद मद से बने मंच पर भी तोड़फोड़ का आरोप
स्कूल परिसर में हाल ही में सांसद मद से छतदार मंच का निर्माण कराया गया था। आरोप है कि असामाजिक तत्वों ने मंच पर लगे सूचना पटल को क्षतिग्रस्त कर दिया। सरकारी राशि से निर्मित सुविधा में तोड़फोड़ की घटना सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
यदि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है तो इसकी जांच कर यह पता लगाना जरूरी है कि नुकसान किसने और किन परिस्थितियों में किया। साथ ही दोषियों की पहचान होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
शिक्षा के मंदिर में शराबखोरी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल परिसर में रात के समय बाहरी लोगों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी नहीं होने से ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिल सकता है। लोगों का सवाल है कि जब स्कूल परिसर में बार-बार शराब की बोतलें और कचरा मिलने की शिकायत है, तो रात में परिसर की निगरानी क्यों नहीं बढ़ाई गई?
यह मामला केवल स्कूल की साफ-सफाई तक सीमित नहीं है। यदि वास्तव में स्कूल परिसर में रात के समय शराबखोरी और तोड़फोड़ हो रही है, तो यह कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सरकारी संपत्ति की सुरक्षा का भी विषय है।
बच्चों की सुरक्षा और माहौल पर भी चिंता
स्कूल परिसर विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और अनुशासित वातावरण वाला स्थान होना चाहिए। ऐसे में यदि वहां शराब की बोतलें या नशे से संबंधित सामग्री मिलती है, तो इसका बच्चों के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
इसके अलावा, रात के समय स्कूल परिसर में अनधिकृत लोगों की मौजूदगी भविष्य में किसी अप्रिय घटना का कारण बन सकती है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए परिसर की चारदीवारी, मुख्य प्रवेश द्वार, प्रकाश व्यवस्था और रात्रिकालीन निगरानी की स्थिति की समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
सीसीटीवी और रात्रि निगरानी की उठी मांग
स्थानीय लोगों और स्कूल से जुड़े लोगों ने प्रशासन से स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के साथ सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और रात के समय निगरानी बढ़ाई जाए। इसके अलावा स्कूल परिसर में अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति द्वारा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पुलिस और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने पुलिस एवं प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल परिसर में मिलने वाली शराब की खाली बोतलों और अन्य सामग्री के संबंध में जांच की जाए तथा रात के समय स्कूल परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान की जाए।
लोगों का यह भी कहना है कि स्कूल प्रबंधन को अकेले सफाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने के बजाय पुलिस, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर स्थायी समाधान तलाशना चाहिए।
बड़ा सवाल—कब रुकेगी स्कूल परिसर में असामाजिक गतिविधियां?
सरगबुंदिया हाईस्कूल से जुड़ी शिकायतों ने स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शराबखोरी, गंदगी और तोड़फोड़ के आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था करना जरूरी होगा।
अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या स्कूल परिसर की रात्रिकालीन निगरानी बढ़ाई जाएगी? क्या सीसीटीवी और प्रकाश व्यवस्था की व्यवस्था होगी? क्या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या बच्चों के स्कूल परिसर को कथित असामाजिक गतिविधियों से पूरी तरह सुरक्षित किया जा सकेगा?
स्थानीय लोगों को अब प्रशासन की ठोस कार्रवाई का इंतजार है।









